तुम्हारी सुन्दर सी आँखे
और उन आँखों में बसी सिर्फ़ मैं
और मुझमें बसे तुम
तो डूब गए न तुम अपनी ही आँखों में
सुनो ,,
ये कविता तो औरों के पढ़ने के लिए है
तुम्हारे लिए तो मेरे ह्रदय में बसा प्रेम है
जो शब्दों की माला में पिरोकर तुम्हें दे रही हूँ।।
प्रिया मिश्रा :)
मैं ईश्वर से मांगती हूँ
मेरी ख़ुशी
तुम्हारी ख़ुशी
हमारी ख़ुशी
मैं ईश्वर से मांगती हूँ
तुम्हें
और सिर्फ तुम्हें
जो की,,ईश्वर
की हथेली से फिसलते हुए
तुम
मेरे आँचल से आ लिपटे हो
तो
अब
टाँक लेना चाहती हूँ
तुम्हे अपनी ओढ़नी में
जिसमें तुमने टाँके है
ढेरों हरश्रृंगार के पुष्प
अपनी प्रेम की बगिया से चुन चुन के।।
प्रिया मिश्रा :)
बहुत बहुत आभार प्रिया जी
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