तुम आओगी 

जब मेरी ब्याहता बनकर

 तब लिखूंगा मैं तुम्हारे लिए एक उपन्यास 

जिसमें होगा संकोच जो हुआ था हमें तुमसे पहली दफ़ा बात करते हुए 

 सिहरन जो हुई थी मेरे शरीर में तुम्हारा पहली दफ़ा हाँथ थामते हुए

 कर दूंगा कैद उस उपन्यास के पन्नों में वो तुम्हारे दिए हुए पहले ग़ुलाब की सुगंध 

 और

 मेरे माथे पे दिए हुए तुम्हारे उस पहले बोसे का सुकूँ 

अंत में मैं लिख कर अमर कर दूंगा 

उन पन्नों में हमारे उस प्रेम को

जो

 रहेगा हम दोनों के ही बीच अमर

 इस जन्म और अगले सात जन्म तक

 

 प्रिया मिश्रा :)) 

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