अब जरुरी है की किताबो में बदलाव की जाये
इतिहास , भूगोल और विज्ञान के स्थान पे
मानवता की एक किताब रखी जाये ||
बहुत हो गया ये शब्दों का ज्ञान
जरुरी है अब थोड़ा की
वास्तविकता से परिचय किया जाये ||
जान ले की जन्म क्या है
और मृत्यु कहाँ ले जाएगी ||
अब धर्म - अधर्म पे
बाद - बिवाद ख़त्म किया जाये
जरुरी हैं की अब थोड़ा
भू को पढ़ा जाये
भूमि से प्रेम किया जाये ||
प्रिया मिश्रा
"जीवन की आपा - धापी " जीवन की आपा - धापी में कही तू तेरा मकान ना भूल जाये वो शहर वो आसमान ना भूल जाये दो सिक्के जमीं पे गिर गए तो गम ना कर हाथो से वो , तेरा करीबी रिस्ता ना छूट जाये || बड़े मुश्किल से मिलते हैं दिल से हाल पूछने वाले तुझसे चाहने तुझे सराहने वाले कही इस आप - धापी में कोइ वो चेहरा ना ग़ुम हो जाये || जीवन की आप - धापी में कही तू तेरा मकान ना भूल जाये वो शहर वो आसमान ना भूल जाये || कोइ गुजर रहा होगा तेरे इन्तजार के पलों से वो तेरा यार ना रूठ जाये जीवन की आपा - धापी में वो तेरा प्यार का गुलिस्तां ना छूट जाये || थाम लेना उस हमदम के हाथो को तेरा हमकदम तेरा हमसफ़र ना छूट जाये जीवन की आपा - धापी में तेरी जमीं तेरा आसमान ना छूट जाये || तू नहीं कोइ खुदा कही तुझे ये गुमा ना हो जाये संभाल लेना खुद को इस चकाचौंध से की कोइ तेरा अपना अँधेरे में ना ग़ुम हो जाये || जीवन की आपा - धापी में कही तू तेरा मकान ना भूल जाये वो शहर वो आसमान ना भूल जाये || प्रिया मिश्रा :)
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