संवाद

तुम अँधेरे में क्यों रहते हो
क्युकी मैं अँधेरे में ही पला - बढ़ा हूँ | ये तो मेरे माँ - पापा जैसे है | इसे  नहीं छोड़ सकता |
तो फिर कुछ दिनों के लिए रौशनी की तलाश क्यों थी तुम्हे ?
सूना था की रौशनी  महबूबा सी  सुन्दर होती है | बस वही देखना था की अँधेरे से निकला हुआ आदमी कितनी देर तेज रौशनी में देख सकता है ||
फिर क्या मिला तुम्हे वहाँ जाके?
कुछ नहीं ,अँधेरे से और प्रेम हो गया ||

प्रिया मिश्रा :)  

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