आज तो तुम चले गए हो
हाथ छुड़ा के
एक दिन ऐसा होगा
तुम "लौटोगे"
लेकिन हम नहीं होंगे
कहाँ "ढूंढोगे"
हम तो तुम्हारे लिए
पानी पे "फ़ेके" हुए
कंकड़ ,
से बनने वाले "चूड़ियों" की तरह थे
अब नया पत्थर पुरानी "चूड़ियां"
नहीं बना पायेगा ||
प्रिया मिश्रा :))
वाह वाह
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