मैं तुम्हारे हर दुःख में बराबरी का रिश्ता चाहती हूँ
मैं प्रेमिका नहीं तुम्हारी पत्नी होना चाहती हूँ ||
मुझे नहीं शौक सिनेमा घरो की टिकटों का
मैं तो पायल की मधुर ध्वनि को तुम्हारे जीवन में भरना चाहती हूँ ||
मुझे नहीं की मेरे कोइ सहेली हो
मैंने तो तुम्हारे "माँ" की सहेली होना चाहती हूँ ||
सुनो , नहीं होंगे निराश तुम
यकीं कर लो , मैं रहूंगी तुम्हारे पापा की
बुढ़ापे की लाठी बनके
मैं नहीं होना चाहती तुम्हारी प्रेमिका
मैं तो तुम संग कंधे से कन्धा मिला के चलना चाहती हूँ ||
ना लाओ चाँद - तारे तोड़ के
मैं नहीं मांगती स्वर्ग तुमसे
मैं तो चुटकी भर सिंदूर
और एक वादे का मंगलसूत्र चाहती हूँ ||
मैं तुम्हारे हर दुःख में बराबरी का रिश्ता चाहती हूँ
मैं प्रेमिका नहीं तुम्हारी पत्नी होना चाहती हूँ ||
प्रिया मिश्रा :)
"जीवन की आपा - धापी " जीवन की आपा - धापी में कही तू तेरा मकान ना भूल जाये वो शहर वो आसमान ना भूल जाये दो सिक्के जमीं पे गिर गए तो गम ना कर हाथो से वो , तेरा करीबी रिस्ता ना छूट जाये || बड़े मुश्किल से मिलते हैं दिल से हाल पूछने वाले तुझसे चाहने तुझे सराहने वाले कही इस आप - धापी में कोइ वो चेहरा ना ग़ुम हो जाये || जीवन की आप - धापी में कही तू तेरा मकान ना भूल जाये वो शहर वो आसमान ना भूल जाये || कोइ गुजर रहा होगा तेरे इन्तजार के पलों से वो तेरा यार ना रूठ जाये जीवन की आपा - धापी में वो तेरा प्यार का गुलिस्तां ना छूट जाये || थाम लेना उस हमदम के हाथो को तेरा हमकदम तेरा हमसफ़र ना छूट जाये जीवन की आपा - धापी में तेरी जमीं तेरा आसमान ना छूट जाये || तू नहीं कोइ खुदा कही तुझे ये गुमा ना हो जाये संभाल लेना खुद को इस चकाचौंध से की कोइ तेरा अपना अँधेरे में ना ग़ुम हो जाये || जीवन की आपा - धापी में कही तू तेरा मकान ना भूल जाये वो शहर वो आसमान ना भूल जाये || प्रिया मिश्रा :)
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