गुजरने वाला गुजर जाता है
हम वही बैठ के वर्षो मातम मनाते है
हमें आदत है
बदबू में रहने की
हम लाश को कई दिनों तक सड़ाते है
फिर फाक्ते  है शमसान की राख
आदत है हमें
मरे हुए को फूलो का हार डालना
एक मुर्दे के लिए
जिन्दा फूलो से खेल जाना
एक नंगे के बदन पर कपडा नहीं
हमें बखूबी आता है मुर्दो को मखमल में लपेटना ||
प्रिया मिश्रा :) 

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