जिंदगी ( एक और मौका )
प्रियांश : आपसे मिल के बहोत खुसी हुई क्या हम फिर कभी मिल सकते है
अंकिता : हाँ कभी किश्मत ने मिलाना चाहा तो जरूर मिल सकेंगे |
प्रियांश : आप किस्मत पे बिश्वाश रखती है
अंकिता : हां क्यों नहीं ?
आप नहीं रखते ?
प्रियांश : नहीं मैं नहीं रखता
अंकिता : क्यों ?
प्रियांश : यु ही |
अंकिता : अच्छा अब चलती हूँ |
प्रियांश : आपने बताया नहीं फिर मिल सकते है या नहीं ?
अंकिता : कहा तो किश्मत में हुआ तो जरूर मिलेंगे | अभी इजाजत चाहूंगी |
प्रियांश : अच्छा , चलिए आपकी किश्मत हमारी किश्मत मिल जाये और फिर कभी मिले हम | अभी कुछ दूर तो साथ चल सकता हूँ ना |
अंकिता : हाँ बिलकुल |रास्ता मैंने नहीं बनाया |
प्रियांश : अच्छा , हास्य भी करती है आप |
अंकिता : कभी - कभी |
प्रियांश : जाइये | लेकिन आपसे फिर मिलने की ईक्षा रहेगी |
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अंकिता : अच्छा |
कुछ हफ्तों बाद **********************************************************************
प्रियांश : आप यहाँ ?
अंकिता : हाँ मैं हर संडे यहाँ आती हूँ | यहाँ पास ही मेरी एक सहेली रहती है, उस से मिलने और उसके बाद इस पार्क में आके कुछ देर बैठती हूँ | मुझे अच्छा लगता है अकेले रहना खुद से बातें करना इन पंछियो से बातें करना ||
प्रियांश : ओहो , आप तो काफी दार्शनिक हैं | आप लेखक है ?
अंकिता : नहीं , लेखक तो नहीं | लेकिन कुछ लिखना जरूर चाहती हूँ | कुछ ऐसा जिसे सिर्फ पढ़ा ना जाये महसूस किया जाये |
प्रियांश : अच्छा ऐसा क्या लिखना चाहती हैं आप ?
अंकिता : वो तो सोचा नहीं अभी | शायद ये प्रकृति मुझे कुछ कहानी दे दे |
प्रियांश : या फिर हमारी कहानी आप लिखे ?
अंकिता : --------------------------------------------------------------
प्रियांश : अरे ऐसे खामोसी सा ना देखे आप | हम पहले दिन से ही आपसे डरे हुए है यकीं मानिये |
आपकी खामोश आँखे हमें सोने नहीं देती है | ऐसा लगता है , इसमें बहोत कहानी है |
और फिर आप ही ने तो कहा था की किश्मत ने चाहा तो हम जरूर मिलेंगे | देखिये किश्मत ने ही हमें मिलाया है तो कोइ कहानी तो बननी होगी ना |
तो आप लिख देना |
अंकिता : अच्छा आपको शरारत सूझ रही है | परिहास कर रहे मेरा |
प्रियांश : इतना दुशाहस मेरा | नहीं - नहीं |
अंकिता : तो फिर ?
प्रियांश : आप नहीं समझेंगी ? कभी - कभी डॉक्टर भी लेखक बन जाता है | वो भी लिखना चाहता है किसी को
अपने ह्रदय की डायरी में | और उसे कैद कर लेना चाहता है ऐसे जैसे वो सिर्फ उसका होक रह जाये |
अंकिता : ऐसा लगता है आपको भी लेखन का शौक है | में तो समझी थी की ?
प्रियांश : क्या समझी थी आप ?
अंकिता : कुछ नहीं ?
अच्छा अब चलने का वक़्त हो गया ||
प्रियांश : अगले रबिवार आप फिर आएँगी यहाँ ?
अंकिता : हाँ ईश्वर ने चाहा तो |
प्रियांश : अच्छा | मुझे इन्जार रहेगा |
अंकिता : इन्जार करेंगे तो सारी उम्र करना पड़ जायेगा | फिर मुझे दोष न देना आप |
प्रियांश : नहीं दूंगा | मुझे बिश्वाश है , आप मुझे इन्तजार नहीं करने नहीं दोगे |
अंकिता : चंद लम्हो में इतना बिश्वाश ?
प्रियांश : हाँ, हो जाता है कभी - कभी | जब कोइ अपना लगने लगता है |
अंकिता : आपकी बातें मुझे उलझा रही है |
प्रियांश : लेकिन शायद मैं सुलझ रहा हूँ |
अंकिता : शायद आप भी उलझ रहे है , वक़्त के भवर में |
प्रियांश : हो सकता है | लेकिन मैं चाहता हूँ उलझना |
अंकिता : हमें माफ़ करे |
प्रियांश : क्यों माफ़ी किस बात की ?
अंकिता : यूँ ही , कभी - कभी मांग लेनी चाहिए | अच्छा अब चलती हूँ |
प्रियांश : मैं इन्तजार करूँगा ||
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कुछ महीनो बाद
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प्रियांश : रुकना जरा एक आवाज जानी पहचानी से आई है
मित्र : किसकी है यार , तेरे तो कान बजते है | जबसे वो लड़की तेरे जीवन में आई है | हम यहाँ चिल्ल करने आये थे | तू हैं की |
प्रियांश : रुक ना यार | आता हूँ |
मित्र : जा बे | मोहतरमा कही भाग ना जाये फिर से |
प्रियांश दौड़ते हुए ......
हेलो , हेलो मैडम रुकिए जरा। ........
कोइ लड़की : जी कहिये | ओह्ह आप
प्रियांश : हाँ मैं | किश्मत ने हमें फिर से मिला दिया |
अंकिता : अच्छा |
प्रियांश : हाथ पकड़ते हुए। ....... अंकिता अब नहीं जाओगी ना। ...... मैंने इन्तजार किया है यार तुम्हारा पुरे ३ माह तक उस पार्क के उसी कुर्शी पर की कही तुम मुझे ढूंढ़ती हुई थक ना जाओ | क्यों किया तुमने ऐसा | नहीं आना था तो बता देती | ऐसे जाने का क्या मतलब | किसी को परेशान करने का क्या मतलब |
अंकिता : हाथ छोड़ दीजिये सभी लोग देख रहे है | क्या कर रहे है आप | मैंने कहा था आपसे इन्तजार मत कीजियेगा मेरा | फिर क्यों किया आपने |
प्रियांश : सबकुछ जो तुम चाहोगी वही होगा | किसने हक़ दिया है तुमको |
अंकिता : मैंने कब कहा की मेरा कोइ हक़ है | मैंने कब कहाँ की मैं जो चाहूंगी वही होगा |
प्रियांश : तो समझती क्यों नहीं | मैं तुमसे प्यार करने लगा हूँ |
जबसे तुमको पहली बार देखा था तबसे | तुम्हे बहोत प्यार करता हूँ मैं |
अंकिता : बहुत प्यार का मतलब भी समझते है आप लोग ?
प्रियांश : क्या मतलब है तुम्हारा ?
अंकिता : मेरा रास्ता छोड़े और मुझे जाने दे | ऐसे यहाँ तमाशा करने का कोइ मतलब नहीं ||
प्रियांश : नहीं हरगिज नहीं | तुम्हे मुझे बताना होगा | क्या मतलब था तुम्हारा |
क्या प्रूफ दूँ मैं की तुम्हे प्यार करता हूँ |
अंकिता : मुझे नहीं चाहिए आपका कोइ प्रूफ | आप मुझे जाने दे |
प्रियांश : रुको तो सही | मेरी आँखों में क्या तुम्हे कुछ नहीं दीखता |
अंकिता : नही |
प्रियांश : किस मिटटी की बनी हो तुम |
अंकिता : आप व्यर्थ ही अपना समय नष्ट कर रहे है और मेरा भी |
प्रियांश : ठीक है जाओ | मैं नहीं रोकूंगा | लेकिन याद रखना अगर फिर कभी हमें किश्मत ने मिलाया तो
तुम्हे बताना होगा मतलब | समझाना होगा मुझे तुम्हे क्यों नफरत है मुझसे | मानती हो ना तुम किस्मत को | और मैं तुम्हे मानता हूँ |
अंकिता याद रखना अब कभी जो हम मिले तुम्हे बताना होगा मुझे ठुकराने का कारन |
अंकिता जा चुकी है
प्रियांश : वही मॉल के बिच रस्ते में फुट - फुट कर रोने लगा | वो बेतहाशा सा गिर पड़ा था जमीं पर |
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अगले दिन शाम में। ....... .... *********************************************************************************
एक रेस्तरे में। .
प्रियांश और अंकिता फिर टकराते है |
प्रियांश : हम फिर टकराये है | कोइ तो वजह होगी यार |
अंकिता : कोइ वजह नहीं हैं आप मुझे बस परेशान कर रहे है
प्रियांश : मैं आपको परेशान नहीं कर रहा | आप मुझे परेशां कर रहे है |
अंकिता : मैं आपको नहीं परेशान कर रही |
अंकिता : अम्बिका ( अंकिता की दोस्त ) चलो हम कही और चलते है |
प्रियांश : अम्बिका रुके आप | कोइ कही नहीं जायेगा | मैं चला जा रहा हूँ |
अंकिता : धन्यवाद |
अम्बिका : तू उसके साथ इतना उखड के क्यों रहती है | हर कोइ एक जैसा नहीं होता |
अंकिता : पता नहीं | मैं अब किसी पे बिश्वाश नहीं कर सकती |
अम्बिका : आखिर कब तक कभी तो तुझे किसी का हाथ थामना होगा |
अंकिता : तब की तब देखेंगे | माँ - पापा जहाँ कह दे कर लुंगी शादी |
अम्बिका : तेरे माँ - पापा को तुझसे बेहतर मैं जानती हूँ | वो ४५ साल का बूढ़ा लाएंगे तेरे लिए |
अंकिता : मुझे कोइ फर्क नहीं पड़ता |
अम्बिका : हाँ तुझे क्यों पड़ने लगा | तू तो पागल हो गयी है | ऐसा क्या गुनाह कर दिया था तूने |
अंकिता : गुनाह ही तो किया था मैंने | उसकी ही सजा है ये सब |
अम्बिका : तुम पागल मत बनो | क्यों सजा दे रही हो खुद को | गलती कोइ और करे और सजा कोइ और भुक्ते ये कहाँ का न्याय हैं |
अंकिता : न्याय आज तक मिला कहाँ है किसी सच्चे इंसान को | किस न्याय की बात कर रही हो तुम अम्बिका |
अम्बिका : नहीं ऐसा नहीं है | तुमने दुबारा सोचा कहाँ कभी जिंदगी को नए सिरे से |
अंकिता : नहीं सोचना मुझे |
अम्बिका : वो अच्छा लड़का लगा मुझे | वो सच में तुमसे प्यार करता है | मैंने उसकी आँखों में देखा है | उसकी सच्चाई को |
अंकिता : सचाई आँखों में नहीं दिखती है | फरेब भी कहाँ दीखता है | सब मतलबी है | मतलब निकलने आया होगा ये भी | भूख होगी ऐसी भी या तो पैसे की या तो शरीर की |
अम्बिका : तुम पागल हो चुकी हो | उसको एक मौका तो दो | खुद को शाबित करने का |
अंकिता : नहीं देना मुझे मौका | अब चले हम | और हाँ मुझे इस टॉपिक पे कोइ बात नहीं करनी |
अम्बिका : मैं उस लड़के से जरूर मिलूंगी और बात भी करुँगी |
अंकिता : तुम्हे जो करना है करो , मुझे इन सब से दूर रखो |
अम्बिका : हाँ तुम दूर ही रहो | तुम्हे जब समझ आएगी वो खुद ही चला गया होगा |
अंकिता : जाये तो जाये मेरी बला से |
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अम्बिका और अंकिता दोनों घर आ जाते है | *********************************************************************************
प्रियांश के घर पे फोन की घंटी बजती है ***
प्रियांश : हेलो कौन ?
अम्बिका : हेलो मैं अम्बिका बोल रही हूँ | क्या प्रियांश से बात हो सकती है ?
प्रियांश : मैं प्रियांश ही बोल रहा हूँ |
अम्बिका : हेलो प्रियांश सॉरी वो मैंने आपका नम्बर रेस्तरां की मेंशन डायरी से चुराया | आई होप आपको बुरा ना लगा हो |
प्रियांश : नहीं , कोइ बात नहीं | कहें क्यों फोन किया आपने |
अम्बिका : क्या आप मुझसे आज शाम मिल सकते है | जहाँ हम कल मिले थे |
प्रियांश : देखिये आपको तो पता है आपकी दोस्त को आपका मुझसे मिलना पसंद नहीं आएगा | वो मुझसे नफरत करती है | लेकिन क्यों मुझे पता नहीं |
अम्बिका : नहीं - नहीं | आप वो सब मुझपर छोड़ दे | आप बस आने का प्रयाश कीजियेगा |
प्रियांश : ठीक है | मैं शाम में आ जाऊंगा |
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रेस्तरां में **********************************************************************
अम्बिका : हाय प्रियांश सॉरी मैं थोड़ी लेट हो गयी |
प्रियांश : कोइ बात नहीं | कहें क्यों बुलाया मुझे |
अम्बिका : देखिये अंकिता की तरफ से मैं आपसे माफ़ी मांगती हूँ | वो जैसे आपको दिख रही है | वैसी बिलकुल नहीं है | वास्तव में उसके साथ एक घटना हो गयी हैं जिससे वो बिलकुल टूट गयी है |
प्रियांश : कैसे घटना ? क्या हुआ है ? आप मुझे बिश्तार से बताये |
अम्बिका : वो आज से चार साल पहले किसी लड़के से प्रेम करती थी | लेकिन वो लड़का अच्छा नहीं था |
उसने अंकिता को घर से भाग जाने के लिए मना लिया | अंकिता घर से भाग गयी और कुछ पैसे भी वो चुरा के ले गयी अपने घर से | लेकिन वो लड़का वो पैसा लेके चला गया और फिर कभी नहीं आया | अंकिता मेरे ही पास रुकी थी | उसने बहोत मुश्किल से अपनी दूसरी जिंदगी सुरू की | अभी कुछ महीनो पहले ही वो अपने माँ -- पापा से मिल पाई है | उनलोगो ने तो उसे अपनाने से भी इंकार कर दिया था |
बहोत मुश्किल से इस बात पर माने है की | एक अमीरजादे से उसकी शादी करा देंगे | जिस से उनका भी भला हो और ये अंकिता का बोझ भी उनके सर से टल जाये | आप मुझे अच्छे लड़के लगते हो | अगर आप सचमुच अंकिता को पसंद करते हो तो मुझे आपके जवाब का इन्तजार रहेगा |
आई होप उसका पास्ट आपका प्यार कम ना कर दे | उसने तो बस प्रेम के प्रति समर्पण दिखाया था |
छलने वाला छल गया तो वो क्या करे |
प्रियांश : मैं अभी कुछ बोलने की हालत में नहीं हूँ | इतना कुछ झेला है उसने | मैं आपको अभी कहे देता हूँ
मेरा प्रेम उसके लिए कम ना हुआ बल्कि और बढ़ गया है |
जो एक गलत आदमी के साथ समर्पण दिखा सकती है | वो सही आदमी के साथ के साथ तो जाने क्या कर जाये | मैं तो अब उसकी पूजा करने लगा हूँ |
अम्बिका : तो प्रियांश आपको अंकिता के घर रिश्ता भेजना होगा | वो ऐसे नहीं मानेगी |
प्रियांश : मुझे मंजूर है | मैं कल ही अपने माँ - पापा से बात करके आपको बताता हूँ |
अम्बिका : धन्यवाद आपका |
प्रियांश : मैं आपका ये एहशान कभी नहीं भूलूंगा अम्बिका |
अम्बिका : इसमें एहशान कैसा | आप अच्छे इन्शान हो आपके साथ अच्छा ही होना चाहिए |
प्रियांश : आप जैसा चाहती है वैसा ही होगा |
अम्बिका : अच्छा अब चलती हूँ |
प्रियांश : ओके बाई अम्बिका जी |
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वो शाम गुजर गयी ********************************************************************
अम्बिका : मैंने प्रियांश को सारी तेरी कहानी बता दी | वो मान गया है | उसने बोला हैं वो अपने माँ - पापा से बात करके मुझे बताएगा |
अंकिता : तुम पागल हो गयी हो | अच्छा ही किया तुमने उसे बता दिया | अब वो खुद ही दूर हो जायेगा मेरी जिंदगी से |
अम्बिका : वो ऐसा नहीं है | सब लोग एक जैसे नहीं होते अंकिता | तू समझती क्यों नहीं |
अंकिता : समझा ही तो था | और समझ गयी |
अम्बिका : अंकिता जिंदगी को एक मौका देना सीखो |
अंकिता : नहीं देना मुझे जिंदगी को एक मौका |
अम्बिका : अच्छा तो फिर क्या करना है | क्या कहना चाहती हो की जो तुम्हे लूट कर मजे कर रहा है तुम उसके लिए अपनी पूरी जिंदगी बिता दोगी | या उसे भूल जाओगी |
अंकिता : मैं उसे भूल गयी हूँ | बस अपने आप को माफ़ नहीं कर पाई |
अम्बिका : क्यों नहीं कर पाई | तुम्हारा क्या कसूर था | तुमने तो वही किया जो एक प्रेमिका को उस समय करना चाहिए | अंकिता जो प्रेम करते है वो भूल नहीं करते | जो छलते है वो भूल करते है | वो गुनाह करते है |
कही ऐसा ना हो इस पछतावे की अग्नि में तुम प्रियांश का प्रेम जला दो |
अंकिता : मुझे ये सब नहीं पता | मुझे माफ़ करो |
अम्बिका : अच्छा कौन सही है इसका फैसला हो जयेगा | कुछ ही दिनों में |
अंकिता : देखते है
अम्बिका : देख लेना
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एक महीने बाद
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प्रियांश : हेलो अम्बिका। ...
अंकिता : आप कौन ?
प्रियांश : मैं प्रियांश बोल हूँ | आप कौन ? मुझे अम्बिका से बात करनी है
अंकिता : सॉरी अम्बिका नहीं है अभी आप बाद में कॉल करना
प्रियांश : हाय अंकिता कैसे हो ?
अंकिता : ठीक हूँ | आप बाद में फोन करे अम्बिका अभी नहीं है |
प्रियांश : ठीक है | क्या मैं तुमसे दो मिनट बात कर सकता हूँ
अंकिता : नहीं सॉरी |
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फोन कट। ***********
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कुछ वक़्त बाद
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अम्बिका : किस्से बात कर रही थी किसका फोन था ?
अंकिता : प्रियांश का | बात कर ले उस से उसे कुछ काम था तुझसे |
अम्बिका : अच्छा करती हूँ अभी फोन | तू यहाँ से जा मेरी माँ
अंकिता : मुझे भी नहीं रुकना यहाँ |
अम्बिका : हां जा जा यहाँ से |
अम्बिका : हेलो प्रियांश ?
प्रियांश : हां अम्बिका सॉरी यार वो तुम्हे फोन नहीं कर पाया | मेरा एक्सीडेंट हो गया था | मैं कुछ बता भी नहीं पाया | हालत बहोत खराब थी | अभी कुछ ठीक हूँ |
अम्बिका :अभी ठीक तो हो तुम ?
मैंने तुम्हारे घर पे फोन किया था | लेकिन किसी ने रिसीव नहीं किया |
प्रियांश :हाँ अब सब अच्छा है | मैं ठीक हूँ |
हां मैं नहीं था यहाँ |कल आया हूँ | तुम्हारा नंबर भी नहीं था | यही डायरी में भूल गया था |
मैं माँ - पापा से फोन पर ही बात करने वाला था | लेकिन सोचा घर जाके बात कर लूँ | इसलिए लेट हो गया | माँ - पापा मान गए है |
अम्बिका : सच | थैंक्स यार प्रियांश | आप सच में बहोत अच्छे हो |
प्रियांश : इसमें थैंक्स की क्या बात है | अपने मेरी बहोत मदद की है | अगर आप ना होते तो सायद मैं और अंकिता मिल भी नहीं पाते |
अम्बिका : ऐसा कुछ नहीं मिलाने वाला तो भगवान् है | मैंने तो बस वही किया जो मुझे अच्छा लगा |
प्रियांश : मेरे लिए तो आप ही भगवान् हो |
अम्बिका : नहीं ऐसा ना कहे आप | अच्छा अभी रखती हूँ | तो आप कब तक रिश्ता भेज रहे अंकिता के घर |
प्रियांश : कल | और सबकुछ अच्छा रहा तो अगले हफ्ते शादी |
अम्बिका : इतनी जल्दी सबकुछ |
प्रियांश : हाँ | मैं चाहता हूँ | जितनी जल्दी हो सके अंकिता के सारे घाव भर दूँ |
अम्बिका : थैंक यू प्रियांश | अब बाई |
प्रियांश : बाय
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अगले दिन *****************************************************************************
अम्बिका : अंकिता तेरे घर से फोन है |
अंकिता : ला दे |
हेलो हां माँ प्रणाम |
माँ : अंकिता तेरे पापा ने तेरा बियाह अगले हफ्ते तय कर दिया है |
अंकिता : ठीक है माँ |
माँ : तुझे लड़के को देखना है तो | बता देना वैसे टाइम नहीं है | फिर भी वो तेरे ही सहर में रहता है | तू चाहे तो हम उसे बोल देंगे |
अंकिता : नहीं माँ | आप पापा जैसा अच्छा समझे करे | मुझे बात नहीं करना |
माँ : ठीक है दो दिन में घर आ जा |
अंकिता : ठीक हैं माँ |
अम्बिका : क्या कहा माँ ने |
अंकिता : मेरी शादी फिक्स हो गयी है किसी से | माँ ने कहाँ मिलना है तो मिल लो | मैंने कहा क्या करना मिल के | और तेरे प्रियांश ने क्या कहा |
अम्बिका : वो तू रहने दे तू तेरी शादी एन्जॉय कर |
अंकिता : मैंने कहा था वो नहीं मानेगा |
अम्बिका : हो सकता है |
कब जाना है घर तुझे ?
अंकिता : सोच रही कल ही चली जाऊँ | तू भी चलेगी |
अम्बिका : नहीं मैं शादी के दिन आ रही |
अंकिता : तू भी साथ चल ना पता नहीं आगे क्या हो |
अम्बिका : सब अच्छा ही होगा | तू आराम से जा मैं आ जाउंगी | अभी बास से छुट्टी नहीं ले सकती | तू तो छुट्टिया लेती नहीं तुझ मिल जाएगी | और तेरी शादी भी है | मुझे नहीं मिलेगी मैं तो जाने कितनी छुटिया ले चुकी |
अंकिता : अब छुटियाँ क्या लेना | इस्तीफ़ा दूंगी |
अम्बिका : अरे पागल ऐसी गलती मत करना | कही तेरे दूल्हे को पसंद हो तेरा काम करना | और फिर माँ ने कहाँ न की वो इसी शहर का है | अभी सिर्फ छुटियाँ ले तू |
अंकिता : बाद में प्रॉब्लम हुई तो |
अम्बिका : मैं हूँ मैं बता दूंगी बॉस को |
अंकिता : ठीक है |
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शादी के बाद *****************************************************************************
अम्बिका : विदाई का वक़्त हो गया है | तू अब भी नहीं देखेगी दूल्हे को | एक बार घूँघट से देख तो ले |
वैसे तुझे फर्क नहीं पड़ता की इसका नाम भी प्रियांश है | और इसने पूरी शादी में कुछ नहीं बोला | कहीं गूँगा निकला तो |
अंकिता : तो क्या करना है नाम से | और गूँगा ही हुआ तो क्या करना है | जैसे अभी तक जीवन गुजरा है वैसे ही गुजर जायेगा |
अम्बिका : तुम पागल हो | अच्छा सुन दूल्हे मिया तो इधर ही आ रहे | शायद तुझसे कुछ बात करना चाहते हो | क्या पता गूंगे की जुबान अभी फुट्टी हो |
अंकिता : तू रुक जा न | मत जा अभी कही | मैं उस से क्या बात करुँगी |
अम्बिका : पागल है क्या | मैं क्या करुँगी | मिया - बीवी में | वो कच्चा नहीं चबा जायज मुझे | कहेगा लो कर लो बात | रात भर जग के मैंने फेरे लिए और मोहतरमा शाली जी हड्डी बानी बैठी है |
अंकिता : अरे रुक जा ना |
अम्बिका : नहीं वो आ गया | मैं चली |
प्रियांश : हाय | आप घूँघट हटा सकती है मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं |
अंकिता : जानी - पहचानी आवाज | अचानक से घूँघट हटा के देखती है |
आप ??
प्रियांश : हाँ मैं | में आपको सच में अपनी जीवन संगनी बनाना चाहता था | और भगवान् ने मेरी सुन भी ली |
अंकिता : सबकुछ जानते हुए भी |
प्रियांश : मैडम वो आपका पास्ट था | सबका कुछ ना कुछ होता है | सच्चा प्यार वही है जो परिस्थितयो का शिकार न हो | में आपसे सच्चा प्यार किया है | मुझे प्रूफ देने की जरुरत नहीं है | आपकी ईक्षा पर है | आप जब तक चाहें मुझसे दूर रह सकती है | और जब चाहें मुझे अपना सकती है |
अंकिता : शुन्य में देखते हुए | प्रियांश आप बहोत अच्छे हो | लेकिन मैं आपके लायक नहीं हूँ |
प्रियांश : लायक और नालायक की गड़ना आप क्यों कर रही वो तो मुझे करना है ना | और मेरे लिए आपसे लायक कोइ और नहीं है |
अंकिता : मुझे माफ़ कर दे मैंने आपसे कभी अच्छे से बात नहीं की | लेकिन मैं मजबूर थी | मैं नहीं चाहती थी मेरे करीब कोइ भी आये |
प्रियांश : वो बातें जाने दीजिये | मैं आपसे एक इजाजत चाहता हूँ |
अंकिता : क्या ?
प्रियांश : क्या मैं आपको एक बार गले लगा सकता हूँ अभी |
अंकिता : आपने मुझे अपना लिया है | मेरे लिए तो आप मेरे देवता हो | मैं अपने देवता को समर्पित हूँ |
प्रियांश : ऐसा ना कहे आप | मैं बस आपको खुस देखना चाहता हूँ | कोइ एहसान नहीं करना चाहता | |
अंकिता प्रियांश के गले लग जाती है |
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समाप्त :)
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इस कहानी का सिर्फ एक ही सारांश है
हर कार्य को सोच समझकर करे | और जिंदगी को एक और मौका दे | सही के साथ कभी गलत नहीं होता |
अगर आप सही है तो आपके साथ सही ही होगा | प्रेम करने वाला कभी गलत नहीं होता | उसका जो गलत फायदा उठाये वो गलत होता हैं |
तो अपने आस पास दिखिए कोइ अंकिता तो नहीं | उसे जीने का एक और मौका दे |
धन्यवाद :
प्रिया मिश्रा :)
प्रियांश : आपसे मिल के बहोत खुसी हुई क्या हम फिर कभी मिल सकते है
अंकिता : हाँ कभी किश्मत ने मिलाना चाहा तो जरूर मिल सकेंगे |
प्रियांश : आप किस्मत पे बिश्वाश रखती है
अंकिता : हां क्यों नहीं ?
आप नहीं रखते ?
प्रियांश : नहीं मैं नहीं रखता
अंकिता : क्यों ?
प्रियांश : यु ही |
अंकिता : अच्छा अब चलती हूँ |
प्रियांश : आपने बताया नहीं फिर मिल सकते है या नहीं ?
अंकिता : कहा तो किश्मत में हुआ तो जरूर मिलेंगे | अभी इजाजत चाहूंगी |
प्रियांश : अच्छा , चलिए आपकी किश्मत हमारी किश्मत मिल जाये और फिर कभी मिले हम | अभी कुछ दूर तो साथ चल सकता हूँ ना |
अंकिता : हाँ बिलकुल |रास्ता मैंने नहीं बनाया |
प्रियांश : अच्छा , हास्य भी करती है आप |
अंकिता : कभी - कभी |
प्रियांश : जाइये | लेकिन आपसे फिर मिलने की ईक्षा रहेगी |
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अंकिता : अच्छा |
कुछ हफ्तों बाद **********************************************************************
प्रियांश : आप यहाँ ?
अंकिता : हाँ मैं हर संडे यहाँ आती हूँ | यहाँ पास ही मेरी एक सहेली रहती है, उस से मिलने और उसके बाद इस पार्क में आके कुछ देर बैठती हूँ | मुझे अच्छा लगता है अकेले रहना खुद से बातें करना इन पंछियो से बातें करना ||
प्रियांश : ओहो , आप तो काफी दार्शनिक हैं | आप लेखक है ?
अंकिता : नहीं , लेखक तो नहीं | लेकिन कुछ लिखना जरूर चाहती हूँ | कुछ ऐसा जिसे सिर्फ पढ़ा ना जाये महसूस किया जाये |
प्रियांश : अच्छा ऐसा क्या लिखना चाहती हैं आप ?
अंकिता : वो तो सोचा नहीं अभी | शायद ये प्रकृति मुझे कुछ कहानी दे दे |
प्रियांश : या फिर हमारी कहानी आप लिखे ?
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प्रियांश : अरे ऐसे खामोसी सा ना देखे आप | हम पहले दिन से ही आपसे डरे हुए है यकीं मानिये |
आपकी खामोश आँखे हमें सोने नहीं देती है | ऐसा लगता है , इसमें बहोत कहानी है |
और फिर आप ही ने तो कहा था की किश्मत ने चाहा तो हम जरूर मिलेंगे | देखिये किश्मत ने ही हमें मिलाया है तो कोइ कहानी तो बननी होगी ना |
तो आप लिख देना |
अंकिता : अच्छा आपको शरारत सूझ रही है | परिहास कर रहे मेरा |
प्रियांश : इतना दुशाहस मेरा | नहीं - नहीं |
अंकिता : तो फिर ?
प्रियांश : आप नहीं समझेंगी ? कभी - कभी डॉक्टर भी लेखक बन जाता है | वो भी लिखना चाहता है किसी को
अपने ह्रदय की डायरी में | और उसे कैद कर लेना चाहता है ऐसे जैसे वो सिर्फ उसका होक रह जाये |
अंकिता : ऐसा लगता है आपको भी लेखन का शौक है | में तो समझी थी की ?
प्रियांश : क्या समझी थी आप ?
अंकिता : कुछ नहीं ?
अच्छा अब चलने का वक़्त हो गया ||
प्रियांश : अगले रबिवार आप फिर आएँगी यहाँ ?
अंकिता : हाँ ईश्वर ने चाहा तो |
प्रियांश : अच्छा | मुझे इन्जार रहेगा |
अंकिता : इन्जार करेंगे तो सारी उम्र करना पड़ जायेगा | फिर मुझे दोष न देना आप |
प्रियांश : नहीं दूंगा | मुझे बिश्वाश है , आप मुझे इन्तजार नहीं करने नहीं दोगे |
अंकिता : चंद लम्हो में इतना बिश्वाश ?
प्रियांश : हाँ, हो जाता है कभी - कभी | जब कोइ अपना लगने लगता है |
अंकिता : आपकी बातें मुझे उलझा रही है |
प्रियांश : लेकिन शायद मैं सुलझ रहा हूँ |
अंकिता : शायद आप भी उलझ रहे है , वक़्त के भवर में |
प्रियांश : हो सकता है | लेकिन मैं चाहता हूँ उलझना |
अंकिता : हमें माफ़ करे |
प्रियांश : क्यों माफ़ी किस बात की ?
अंकिता : यूँ ही , कभी - कभी मांग लेनी चाहिए | अच्छा अब चलती हूँ |
प्रियांश : मैं इन्तजार करूँगा ||
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कुछ महीनो बाद
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प्रियांश : रुकना जरा एक आवाज जानी पहचानी से आई है
मित्र : किसकी है यार , तेरे तो कान बजते है | जबसे वो लड़की तेरे जीवन में आई है | हम यहाँ चिल्ल करने आये थे | तू हैं की |
प्रियांश : रुक ना यार | आता हूँ |
मित्र : जा बे | मोहतरमा कही भाग ना जाये फिर से |
प्रियांश दौड़ते हुए ......
हेलो , हेलो मैडम रुकिए जरा। ........
कोइ लड़की : जी कहिये | ओह्ह आप
प्रियांश : हाँ मैं | किश्मत ने हमें फिर से मिला दिया |
अंकिता : अच्छा |
प्रियांश : हाथ पकड़ते हुए। ....... अंकिता अब नहीं जाओगी ना। ...... मैंने इन्तजार किया है यार तुम्हारा पुरे ३ माह तक उस पार्क के उसी कुर्शी पर की कही तुम मुझे ढूंढ़ती हुई थक ना जाओ | क्यों किया तुमने ऐसा | नहीं आना था तो बता देती | ऐसे जाने का क्या मतलब | किसी को परेशान करने का क्या मतलब |
अंकिता : हाथ छोड़ दीजिये सभी लोग देख रहे है | क्या कर रहे है आप | मैंने कहा था आपसे इन्तजार मत कीजियेगा मेरा | फिर क्यों किया आपने |
प्रियांश : सबकुछ जो तुम चाहोगी वही होगा | किसने हक़ दिया है तुमको |
अंकिता : मैंने कब कहा की मेरा कोइ हक़ है | मैंने कब कहाँ की मैं जो चाहूंगी वही होगा |
प्रियांश : तो समझती क्यों नहीं | मैं तुमसे प्यार करने लगा हूँ |
जबसे तुमको पहली बार देखा था तबसे | तुम्हे बहोत प्यार करता हूँ मैं |
अंकिता : बहुत प्यार का मतलब भी समझते है आप लोग ?
प्रियांश : क्या मतलब है तुम्हारा ?
अंकिता : मेरा रास्ता छोड़े और मुझे जाने दे | ऐसे यहाँ तमाशा करने का कोइ मतलब नहीं ||
प्रियांश : नहीं हरगिज नहीं | तुम्हे मुझे बताना होगा | क्या मतलब था तुम्हारा |
क्या प्रूफ दूँ मैं की तुम्हे प्यार करता हूँ |
अंकिता : मुझे नहीं चाहिए आपका कोइ प्रूफ | आप मुझे जाने दे |
प्रियांश : रुको तो सही | मेरी आँखों में क्या तुम्हे कुछ नहीं दीखता |
अंकिता : नही |
प्रियांश : किस मिटटी की बनी हो तुम |
अंकिता : आप व्यर्थ ही अपना समय नष्ट कर रहे है और मेरा भी |
प्रियांश : ठीक है जाओ | मैं नहीं रोकूंगा | लेकिन याद रखना अगर फिर कभी हमें किश्मत ने मिलाया तो
तुम्हे बताना होगा मतलब | समझाना होगा मुझे तुम्हे क्यों नफरत है मुझसे | मानती हो ना तुम किस्मत को | और मैं तुम्हे मानता हूँ |
अंकिता याद रखना अब कभी जो हम मिले तुम्हे बताना होगा मुझे ठुकराने का कारन |
अंकिता जा चुकी है
प्रियांश : वही मॉल के बिच रस्ते में फुट - फुट कर रोने लगा | वो बेतहाशा सा गिर पड़ा था जमीं पर |
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अगले दिन शाम में। ....... .... *********************************************************************************
एक रेस्तरे में। .
प्रियांश और अंकिता फिर टकराते है |
प्रियांश : हम फिर टकराये है | कोइ तो वजह होगी यार |
अंकिता : कोइ वजह नहीं हैं आप मुझे बस परेशान कर रहे है
प्रियांश : मैं आपको परेशान नहीं कर रहा | आप मुझे परेशां कर रहे है |
अंकिता : मैं आपको नहीं परेशान कर रही |
अंकिता : अम्बिका ( अंकिता की दोस्त ) चलो हम कही और चलते है |
प्रियांश : अम्बिका रुके आप | कोइ कही नहीं जायेगा | मैं चला जा रहा हूँ |
अंकिता : धन्यवाद |
अम्बिका : तू उसके साथ इतना उखड के क्यों रहती है | हर कोइ एक जैसा नहीं होता |
अंकिता : पता नहीं | मैं अब किसी पे बिश्वाश नहीं कर सकती |
अम्बिका : आखिर कब तक कभी तो तुझे किसी का हाथ थामना होगा |
अंकिता : तब की तब देखेंगे | माँ - पापा जहाँ कह दे कर लुंगी शादी |
अम्बिका : तेरे माँ - पापा को तुझसे बेहतर मैं जानती हूँ | वो ४५ साल का बूढ़ा लाएंगे तेरे लिए |
अंकिता : मुझे कोइ फर्क नहीं पड़ता |
अम्बिका : हाँ तुझे क्यों पड़ने लगा | तू तो पागल हो गयी है | ऐसा क्या गुनाह कर दिया था तूने |
अंकिता : गुनाह ही तो किया था मैंने | उसकी ही सजा है ये सब |
अम्बिका : तुम पागल मत बनो | क्यों सजा दे रही हो खुद को | गलती कोइ और करे और सजा कोइ और भुक्ते ये कहाँ का न्याय हैं |
अंकिता : न्याय आज तक मिला कहाँ है किसी सच्चे इंसान को | किस न्याय की बात कर रही हो तुम अम्बिका |
अम्बिका : नहीं ऐसा नहीं है | तुमने दुबारा सोचा कहाँ कभी जिंदगी को नए सिरे से |
अंकिता : नहीं सोचना मुझे |
अम्बिका : वो अच्छा लड़का लगा मुझे | वो सच में तुमसे प्यार करता है | मैंने उसकी आँखों में देखा है | उसकी सच्चाई को |
अंकिता : सचाई आँखों में नहीं दिखती है | फरेब भी कहाँ दीखता है | सब मतलबी है | मतलब निकलने आया होगा ये भी | भूख होगी ऐसी भी या तो पैसे की या तो शरीर की |
अम्बिका : तुम पागल हो चुकी हो | उसको एक मौका तो दो | खुद को शाबित करने का |
अंकिता : नहीं देना मुझे मौका | अब चले हम | और हाँ मुझे इस टॉपिक पे कोइ बात नहीं करनी |
अम्बिका : मैं उस लड़के से जरूर मिलूंगी और बात भी करुँगी |
अंकिता : तुम्हे जो करना है करो , मुझे इन सब से दूर रखो |
अम्बिका : हाँ तुम दूर ही रहो | तुम्हे जब समझ आएगी वो खुद ही चला गया होगा |
अंकिता : जाये तो जाये मेरी बला से |
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अम्बिका और अंकिता दोनों घर आ जाते है | *********************************************************************************
प्रियांश के घर पे फोन की घंटी बजती है ***
प्रियांश : हेलो कौन ?
अम्बिका : हेलो मैं अम्बिका बोल रही हूँ | क्या प्रियांश से बात हो सकती है ?
प्रियांश : मैं प्रियांश ही बोल रहा हूँ |
अम्बिका : हेलो प्रियांश सॉरी वो मैंने आपका नम्बर रेस्तरां की मेंशन डायरी से चुराया | आई होप आपको बुरा ना लगा हो |
प्रियांश : नहीं , कोइ बात नहीं | कहें क्यों फोन किया आपने |
अम्बिका : क्या आप मुझसे आज शाम मिल सकते है | जहाँ हम कल मिले थे |
प्रियांश : देखिये आपको तो पता है आपकी दोस्त को आपका मुझसे मिलना पसंद नहीं आएगा | वो मुझसे नफरत करती है | लेकिन क्यों मुझे पता नहीं |
अम्बिका : नहीं - नहीं | आप वो सब मुझपर छोड़ दे | आप बस आने का प्रयाश कीजियेगा |
प्रियांश : ठीक है | मैं शाम में आ जाऊंगा |
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रेस्तरां में **********************************************************************
अम्बिका : हाय प्रियांश सॉरी मैं थोड़ी लेट हो गयी |
प्रियांश : कोइ बात नहीं | कहें क्यों बुलाया मुझे |
अम्बिका : देखिये अंकिता की तरफ से मैं आपसे माफ़ी मांगती हूँ | वो जैसे आपको दिख रही है | वैसी बिलकुल नहीं है | वास्तव में उसके साथ एक घटना हो गयी हैं जिससे वो बिलकुल टूट गयी है |
प्रियांश : कैसे घटना ? क्या हुआ है ? आप मुझे बिश्तार से बताये |
अम्बिका : वो आज से चार साल पहले किसी लड़के से प्रेम करती थी | लेकिन वो लड़का अच्छा नहीं था |
उसने अंकिता को घर से भाग जाने के लिए मना लिया | अंकिता घर से भाग गयी और कुछ पैसे भी वो चुरा के ले गयी अपने घर से | लेकिन वो लड़का वो पैसा लेके चला गया और फिर कभी नहीं आया | अंकिता मेरे ही पास रुकी थी | उसने बहोत मुश्किल से अपनी दूसरी जिंदगी सुरू की | अभी कुछ महीनो पहले ही वो अपने माँ -- पापा से मिल पाई है | उनलोगो ने तो उसे अपनाने से भी इंकार कर दिया था |
बहोत मुश्किल से इस बात पर माने है की | एक अमीरजादे से उसकी शादी करा देंगे | जिस से उनका भी भला हो और ये अंकिता का बोझ भी उनके सर से टल जाये | आप मुझे अच्छे लड़के लगते हो | अगर आप सचमुच अंकिता को पसंद करते हो तो मुझे आपके जवाब का इन्तजार रहेगा |
आई होप उसका पास्ट आपका प्यार कम ना कर दे | उसने तो बस प्रेम के प्रति समर्पण दिखाया था |
छलने वाला छल गया तो वो क्या करे |
प्रियांश : मैं अभी कुछ बोलने की हालत में नहीं हूँ | इतना कुछ झेला है उसने | मैं आपको अभी कहे देता हूँ
मेरा प्रेम उसके लिए कम ना हुआ बल्कि और बढ़ गया है |
जो एक गलत आदमी के साथ समर्पण दिखा सकती है | वो सही आदमी के साथ के साथ तो जाने क्या कर जाये | मैं तो अब उसकी पूजा करने लगा हूँ |
अम्बिका : तो प्रियांश आपको अंकिता के घर रिश्ता भेजना होगा | वो ऐसे नहीं मानेगी |
प्रियांश : मुझे मंजूर है | मैं कल ही अपने माँ - पापा से बात करके आपको बताता हूँ |
अम्बिका : धन्यवाद आपका |
प्रियांश : मैं आपका ये एहशान कभी नहीं भूलूंगा अम्बिका |
अम्बिका : इसमें एहशान कैसा | आप अच्छे इन्शान हो आपके साथ अच्छा ही होना चाहिए |
प्रियांश : आप जैसा चाहती है वैसा ही होगा |
अम्बिका : अच्छा अब चलती हूँ |
प्रियांश : ओके बाई अम्बिका जी |
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वो शाम गुजर गयी ********************************************************************
अम्बिका : मैंने प्रियांश को सारी तेरी कहानी बता दी | वो मान गया है | उसने बोला हैं वो अपने माँ - पापा से बात करके मुझे बताएगा |
अंकिता : तुम पागल हो गयी हो | अच्छा ही किया तुमने उसे बता दिया | अब वो खुद ही दूर हो जायेगा मेरी जिंदगी से |
अम्बिका : वो ऐसा नहीं है | सब लोग एक जैसे नहीं होते अंकिता | तू समझती क्यों नहीं |
अंकिता : समझा ही तो था | और समझ गयी |
अम्बिका : अंकिता जिंदगी को एक मौका देना सीखो |
अंकिता : नहीं देना मुझे जिंदगी को एक मौका |
अम्बिका : अच्छा तो फिर क्या करना है | क्या कहना चाहती हो की जो तुम्हे लूट कर मजे कर रहा है तुम उसके लिए अपनी पूरी जिंदगी बिता दोगी | या उसे भूल जाओगी |
अंकिता : मैं उसे भूल गयी हूँ | बस अपने आप को माफ़ नहीं कर पाई |
अम्बिका : क्यों नहीं कर पाई | तुम्हारा क्या कसूर था | तुमने तो वही किया जो एक प्रेमिका को उस समय करना चाहिए | अंकिता जो प्रेम करते है वो भूल नहीं करते | जो छलते है वो भूल करते है | वो गुनाह करते है |
कही ऐसा ना हो इस पछतावे की अग्नि में तुम प्रियांश का प्रेम जला दो |
अंकिता : मुझे ये सब नहीं पता | मुझे माफ़ करो |
अम्बिका : अच्छा कौन सही है इसका फैसला हो जयेगा | कुछ ही दिनों में |
अंकिता : देखते है
अम्बिका : देख लेना
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एक महीने बाद
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प्रियांश : हेलो अम्बिका। ...
अंकिता : आप कौन ?
प्रियांश : मैं प्रियांश बोल हूँ | आप कौन ? मुझे अम्बिका से बात करनी है
अंकिता : सॉरी अम्बिका नहीं है अभी आप बाद में कॉल करना
प्रियांश : हाय अंकिता कैसे हो ?
अंकिता : ठीक हूँ | आप बाद में फोन करे अम्बिका अभी नहीं है |
प्रियांश : ठीक है | क्या मैं तुमसे दो मिनट बात कर सकता हूँ
अंकिता : नहीं सॉरी |
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फोन कट। ***********
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कुछ वक़्त बाद
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अम्बिका : किस्से बात कर रही थी किसका फोन था ?
अंकिता : प्रियांश का | बात कर ले उस से उसे कुछ काम था तुझसे |
अम्बिका : अच्छा करती हूँ अभी फोन | तू यहाँ से जा मेरी माँ
अंकिता : मुझे भी नहीं रुकना यहाँ |
अम्बिका : हां जा जा यहाँ से |
अम्बिका : हेलो प्रियांश ?
प्रियांश : हां अम्बिका सॉरी यार वो तुम्हे फोन नहीं कर पाया | मेरा एक्सीडेंट हो गया था | मैं कुछ बता भी नहीं पाया | हालत बहोत खराब थी | अभी कुछ ठीक हूँ |
अम्बिका :अभी ठीक तो हो तुम ?
मैंने तुम्हारे घर पे फोन किया था | लेकिन किसी ने रिसीव नहीं किया |
प्रियांश :हाँ अब सब अच्छा है | मैं ठीक हूँ |
हां मैं नहीं था यहाँ |कल आया हूँ | तुम्हारा नंबर भी नहीं था | यही डायरी में भूल गया था |
मैं माँ - पापा से फोन पर ही बात करने वाला था | लेकिन सोचा घर जाके बात कर लूँ | इसलिए लेट हो गया | माँ - पापा मान गए है |
अम्बिका : सच | थैंक्स यार प्रियांश | आप सच में बहोत अच्छे हो |
प्रियांश : इसमें थैंक्स की क्या बात है | अपने मेरी बहोत मदद की है | अगर आप ना होते तो सायद मैं और अंकिता मिल भी नहीं पाते |
अम्बिका : ऐसा कुछ नहीं मिलाने वाला तो भगवान् है | मैंने तो बस वही किया जो मुझे अच्छा लगा |
प्रियांश : मेरे लिए तो आप ही भगवान् हो |
अम्बिका : नहीं ऐसा ना कहे आप | अच्छा अभी रखती हूँ | तो आप कब तक रिश्ता भेज रहे अंकिता के घर |
प्रियांश : कल | और सबकुछ अच्छा रहा तो अगले हफ्ते शादी |
अम्बिका : इतनी जल्दी सबकुछ |
प्रियांश : हाँ | मैं चाहता हूँ | जितनी जल्दी हो सके अंकिता के सारे घाव भर दूँ |
अम्बिका : थैंक यू प्रियांश | अब बाई |
प्रियांश : बाय
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अगले दिन *****************************************************************************
अम्बिका : अंकिता तेरे घर से फोन है |
अंकिता : ला दे |
हेलो हां माँ प्रणाम |
माँ : अंकिता तेरे पापा ने तेरा बियाह अगले हफ्ते तय कर दिया है |
अंकिता : ठीक है माँ |
माँ : तुझे लड़के को देखना है तो | बता देना वैसे टाइम नहीं है | फिर भी वो तेरे ही सहर में रहता है | तू चाहे तो हम उसे बोल देंगे |
अंकिता : नहीं माँ | आप पापा जैसा अच्छा समझे करे | मुझे बात नहीं करना |
माँ : ठीक है दो दिन में घर आ जा |
अंकिता : ठीक हैं माँ |
अम्बिका : क्या कहा माँ ने |
अंकिता : मेरी शादी फिक्स हो गयी है किसी से | माँ ने कहाँ मिलना है तो मिल लो | मैंने कहा क्या करना मिल के | और तेरे प्रियांश ने क्या कहा |
अम्बिका : वो तू रहने दे तू तेरी शादी एन्जॉय कर |
अंकिता : मैंने कहा था वो नहीं मानेगा |
अम्बिका : हो सकता है |
कब जाना है घर तुझे ?
अंकिता : सोच रही कल ही चली जाऊँ | तू भी चलेगी |
अम्बिका : नहीं मैं शादी के दिन आ रही |
अंकिता : तू भी साथ चल ना पता नहीं आगे क्या हो |
अम्बिका : सब अच्छा ही होगा | तू आराम से जा मैं आ जाउंगी | अभी बास से छुट्टी नहीं ले सकती | तू तो छुट्टिया लेती नहीं तुझ मिल जाएगी | और तेरी शादी भी है | मुझे नहीं मिलेगी मैं तो जाने कितनी छुटिया ले चुकी |
अंकिता : अब छुटियाँ क्या लेना | इस्तीफ़ा दूंगी |
अम्बिका : अरे पागल ऐसी गलती मत करना | कही तेरे दूल्हे को पसंद हो तेरा काम करना | और फिर माँ ने कहाँ न की वो इसी शहर का है | अभी सिर्फ छुटियाँ ले तू |
अंकिता : बाद में प्रॉब्लम हुई तो |
अम्बिका : मैं हूँ मैं बता दूंगी बॉस को |
अंकिता : ठीक है |
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शादी के बाद *****************************************************************************
अम्बिका : विदाई का वक़्त हो गया है | तू अब भी नहीं देखेगी दूल्हे को | एक बार घूँघट से देख तो ले |
वैसे तुझे फर्क नहीं पड़ता की इसका नाम भी प्रियांश है | और इसने पूरी शादी में कुछ नहीं बोला | कहीं गूँगा निकला तो |
अंकिता : तो क्या करना है नाम से | और गूँगा ही हुआ तो क्या करना है | जैसे अभी तक जीवन गुजरा है वैसे ही गुजर जायेगा |
अम्बिका : तुम पागल हो | अच्छा सुन दूल्हे मिया तो इधर ही आ रहे | शायद तुझसे कुछ बात करना चाहते हो | क्या पता गूंगे की जुबान अभी फुट्टी हो |
अंकिता : तू रुक जा न | मत जा अभी कही | मैं उस से क्या बात करुँगी |
अम्बिका : पागल है क्या | मैं क्या करुँगी | मिया - बीवी में | वो कच्चा नहीं चबा जायज मुझे | कहेगा लो कर लो बात | रात भर जग के मैंने फेरे लिए और मोहतरमा शाली जी हड्डी बानी बैठी है |
अंकिता : अरे रुक जा ना |
अम्बिका : नहीं वो आ गया | मैं चली |
प्रियांश : हाय | आप घूँघट हटा सकती है मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं |
अंकिता : जानी - पहचानी आवाज | अचानक से घूँघट हटा के देखती है |
आप ??
प्रियांश : हाँ मैं | में आपको सच में अपनी जीवन संगनी बनाना चाहता था | और भगवान् ने मेरी सुन भी ली |
अंकिता : सबकुछ जानते हुए भी |
प्रियांश : मैडम वो आपका पास्ट था | सबका कुछ ना कुछ होता है | सच्चा प्यार वही है जो परिस्थितयो का शिकार न हो | में आपसे सच्चा प्यार किया है | मुझे प्रूफ देने की जरुरत नहीं है | आपकी ईक्षा पर है | आप जब तक चाहें मुझसे दूर रह सकती है | और जब चाहें मुझे अपना सकती है |
अंकिता : शुन्य में देखते हुए | प्रियांश आप बहोत अच्छे हो | लेकिन मैं आपके लायक नहीं हूँ |
प्रियांश : लायक और नालायक की गड़ना आप क्यों कर रही वो तो मुझे करना है ना | और मेरे लिए आपसे लायक कोइ और नहीं है |
अंकिता : मुझे माफ़ कर दे मैंने आपसे कभी अच्छे से बात नहीं की | लेकिन मैं मजबूर थी | मैं नहीं चाहती थी मेरे करीब कोइ भी आये |
प्रियांश : वो बातें जाने दीजिये | मैं आपसे एक इजाजत चाहता हूँ |
अंकिता : क्या ?
प्रियांश : क्या मैं आपको एक बार गले लगा सकता हूँ अभी |
अंकिता : आपने मुझे अपना लिया है | मेरे लिए तो आप मेरे देवता हो | मैं अपने देवता को समर्पित हूँ |
प्रियांश : ऐसा ना कहे आप | मैं बस आपको खुस देखना चाहता हूँ | कोइ एहसान नहीं करना चाहता | |
अंकिता प्रियांश के गले लग जाती है |
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समाप्त :)
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इस कहानी का सिर्फ एक ही सारांश है
हर कार्य को सोच समझकर करे | और जिंदगी को एक और मौका दे | सही के साथ कभी गलत नहीं होता |
अगर आप सही है तो आपके साथ सही ही होगा | प्रेम करने वाला कभी गलत नहीं होता | उसका जो गलत फायदा उठाये वो गलत होता हैं |
तो अपने आस पास दिखिए कोइ अंकिता तो नहीं | उसे जीने का एक और मौका दे |
धन्यवाद :
प्रिया मिश्रा :)
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