संवाद
अगर मैं कभी न रहु तो तुम क्या करोगे
अब वो चुटकुला मत सुना देना की मैं पागल हो जाऊंगा | फिर मैं कहूँगी ओह इतना प्यार करते हो मुझसे | फिर तुम कहना नहीं मैं दूसरी लाऊंगा | पागल तो कुछ भी कर सकता है ||
हहहहह ना मैं ऐसा कुछ भी नहीं करूँगा
मैं एक चित्रकार हूँ तुम्हे खोज लूंगा अपने चित्रों में , अपने रंगो में और सजा दूंगा अपने ह्रदय में |
एक ऐसे कोने में जहाँ तुम सबसे जायदा सुरक्षित रहो और बस मैं तुम्हे देख सकूँ ||
कोइ और तुम्हारा साया भी ना छू पाए ||
इतना प्रेम करते हो मुझसे
इतना नहीं बहोत जायदा प्रेम करता हूँ तुमसे | लेकिन शब्दों में ऐसे बांधना नहीं चाहता |
मैं चाहता हूँ जैसे आसमान कभी नीला कभी लाल सा दिखाई देता है वैसे ही हमारा प्रेम कई रंगो में दिखे |
तुम मेरी अंतरात्मा में रहो हमेसा हसती हुई | खिलती हुई | तुम्हारी मासूमियत | तुम्हारा बचपन सब जीवित रहे मेरी बाँहों में |
बस इतना सा प्रेम करता हूँ मैं तुमसे ||
प्रिया मिश्रा :)
अगर मैं कभी न रहु तो तुम क्या करोगे
अब वो चुटकुला मत सुना देना की मैं पागल हो जाऊंगा | फिर मैं कहूँगी ओह इतना प्यार करते हो मुझसे | फिर तुम कहना नहीं मैं दूसरी लाऊंगा | पागल तो कुछ भी कर सकता है ||
हहहहह ना मैं ऐसा कुछ भी नहीं करूँगा
मैं एक चित्रकार हूँ तुम्हे खोज लूंगा अपने चित्रों में , अपने रंगो में और सजा दूंगा अपने ह्रदय में |
एक ऐसे कोने में जहाँ तुम सबसे जायदा सुरक्षित रहो और बस मैं तुम्हे देख सकूँ ||
कोइ और तुम्हारा साया भी ना छू पाए ||
इतना प्रेम करते हो मुझसे
इतना नहीं बहोत जायदा प्रेम करता हूँ तुमसे | लेकिन शब्दों में ऐसे बांधना नहीं चाहता |
मैं चाहता हूँ जैसे आसमान कभी नीला कभी लाल सा दिखाई देता है वैसे ही हमारा प्रेम कई रंगो में दिखे |
तुम मेरी अंतरात्मा में रहो हमेसा हसती हुई | खिलती हुई | तुम्हारी मासूमियत | तुम्हारा बचपन सब जीवित रहे मेरी बाँहों में |
बस इतना सा प्रेम करता हूँ मैं तुमसे ||
प्रिया मिश्रा :)
Perfect
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