कुछ लड़किया बहोत दुखी थी की वो सुंदर क्यों नहीं है | उन्हें  शिकायत थी की उनमे वो चंचलता क्यों नहीं है |
लेकिन जब उन्होंने प्रकृति  सुंदरता को दिन - दिन मरते देखा , उसकी चंचलता को निरश्ता में बदलते देखा |
तो वो लड़किया अब सुंदर होना अभिशाप मानती है ||

प्रिया मिश्रा :)

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आदमी सहजता से उठा लेता है
हर बोझ अपने कंधे पर

औरत सहजता से
 उस बोझ को छुपा लेती
अपने आँचल में
जो आदमी उठा के
थक जाता है अपने  कंधे पर

प्रिया मिश्रा :)

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मैं सभ्य ना हुआ
स्वभाव था मेरा डसना

मुझे प्रकृति ने बनाया ऐसा
फिर  भी मैं
कारन से डंसु
छोड़ो मानस मेरी कहानी

तुम्हारी प्रविर्ती ऐसी ना थी
तुम तो सौम्य जन्मे
फिर कहाँ से तुमने
बिष का गहना पहना

बताओ मनुष्य
तुमने कहा से सीखा डँसना

प्रिया मिश्रा :)

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नैनो में सपने बसे
प्रकीर्ति धीमे - धीमे पंखा झले

ये सपनो की दुनिया में
हर आदमी सीधा चले

कितना अच्छा हो
ये सपना अनवरत चले

प्रिया मिश्रा :)

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