मैं अक्सर चाय पे
गंभीर चर्चाये करती हूँ
ताकि बातो की गंभीरता
चाय की मिठास में घुल जाये
और रिस्तो में कोइ कड़वाहट न आये ||

प्रिया मिश्रा :)

__________________________________________________________________________________

मुस्कुराइए भी
इतनी क्या महंगाई आ गयी की,
आपकी चार आने की मुस्कान
महंगी हो गयी ||

प्रिया मिश्रा :)

____________________________________________________________________________________

खामोसी दबे पाँव आती है
फिर जीवन भर शोर करती है
सन्नाटे का शोर ||

प्रिया मिश्रा :)

________________________________________________________________________________

प्रेम समर्पण मांगता है
और परिस्थितिया दान
दोनों के साथ कैसे दे

प्रिया मिश्रा :)

___________________________________________________________________________________

जिज्ञासा प्रश्न की जननी है
प्रश्न उत्तर का जनक ||

प्रिया मिश्रा :)

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog