मैं किसी भी सवाल का उत्तर ढूँढू
प्रिया मिश्रा :) 
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मैं लिखते - लिखते थक गयी थी
शब्द मुझे समझ ना पाए थे
ये कहानी थी मेरी
जो इतिहास बननी थी
लेकिन बूंदा - बांदी हूँ वक़्त की
और मेरे शब्द ठहर ना पाए थे ||
अब फिर से लिख रही हूँ एक नई कहानी
एक नया कुछ
एक नई आत्मा
एक नई मैं ||

प्रिया मिश्रा :)
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जो हमारे लिए आवाज नहीं उठा सकता
वो हमारे लिए कोइ कदम कैसे ले सकता है
जो एक कदम भी नहीं बढ़ा सकता हमारे  लिए
वो कैसे तय करेगा , हमारी दुरी को
तो क्या प्रतीक्षा
एक प्रश्न नहीं रह जायेगा  वहाँ
जहाँ उत्तर निढाल पड़ा है ||

प्रिया मिश्रा
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हर व्यक्ति को अपनी भूल सुधारने की  सिर्फ एक ही युक्ति
सूझती है , भूल को भूल समझ के भूल जाओ

प्रिया मिश्रा :) 
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आज जो पोस्टरों में घूम रहे है कल कही वो अंधेरो में खोये थे
जुटा रहे थे दो वक़्त की रोटी, और कपड़ो में कई  छिद्र थे 
जिन्हे छुपा के रखा, ताकि दिखे ना किसी को की ,
शब्दों से धनवान लोग, गरीब है दो  वक़्त की रोटी से
चिराग तब जलाना चाहिए था
अब पोस्टरों का क्या ?
जब पोस्टर वाला ही नहीं
ये दुनिया कितनी पिछड़ी है
और कब तक रहेगी ?
प्रिया मिश्रा :)
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  जीवनसाथी वही है, जो प्रकाश की और ले जाये | सन्मार्ग दिखाए |
जहाँ प्रकाश नहीं
वहाँ जीवन नहीं
और जहां
जीवन नहीं
वहाँ सन्मार्ग संभव ही नहीं ||

प्रिया मिश्रा
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उल्टा छाता लिए बैठे हो
ज़माने की बरसात में
पैर के निचे कीचड़ तो आएगा ही ||

प्रिया  मिश्रा 

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