राजनीति अर्थात राज करने की नीति
क्यों न हम खुद को संभालना सिख ले
अपने कर्तब्यो को पहचान ले
अपनी कमजोरियों को मजबूती में ढाल ले
क्यों न हम सब मिलकर इस नीति को ही मिटा दे
ना कोइ राजा हो
न कोइ प्रजा
और ना हो ये खोखली राजनीति

प्रिया मिश्रा :)

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मैं कोइ अमीरी की बात नहीं कहूँगी
मैं कोइ गरीबी की बात  भी नहीं कहूँगी
मैं आदमी और औरत के फर्क की बात नहीं करुँगी
मैं मानवता और समानता की बात करुँगी
क्या ये संभव है
या  बदल दे चर्चा
और फिर से बात उठाये
वही गरीबी और असमानता की
अगर समस्याओ पर ही चर्चा होगा
तो समाधान  पर कब होगा

प्रिया मिश्रा :)

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जितने वाले की एक कहानी होती है
हारने वाले का कोरा कागज ||

प्रिया मिश्रा :)

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तू रह ले मशरुफ़
हम तुझसे फुर्शत वाला इश्क निभाएंगे
लेकिन जब हम मशरूफ़ हो जायेंगे
तुझे बहोत याद आएंगे ||

प्रिया मिश्रा :)

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हमारी कहानी को किसी की नजर न लगे
इसलिए इसे मैंने कविता में पीरों दिया है
लोग समझेंगे कवी बावला था
और पढ़ के मुस्कुरायेंगे ||

प्रिया मिश्रा :)

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