सुनो द्रोपदी

सुनो द्रोपदी
अब तुम ना श्रृंगार करो

रहने दो चूरामणि
लो खड़ग, अब पापियों का संघार करो ||

कब तक यु ही
 सभा के बोलने का
इन्तजार होगा ??

कब तक द्रोपदी
तुम्हारा अपमान होगा ??

कभी तो सवाल उठाना होगा
कब तक जवाब का इन्तजार होगा ??

मैं तो कहता हूँ
रहने दो
कृष्ण को
तुम ही अब
उद्धार करो

सुनो द्रोपदी
अब तुम ना श्रृंगार करो ||

अब रहने दो
ये नौलखा हार
मुंडमाला का अब
समय आ गया
 उठावो खडग
और पापियों का संघार करो

सुनो द्रोपदी
अब तुम मत श्रृंगार करो ||

अँधा राजा
अंधी प्रजा
जुआ खेल
स्त्री हार
अब कैसा मेल
और कैसे संधी

अब उठा लो
जंजीर बना लो बंदी

अब न केशव का
इन्तजार करो
अब प्रहार का वक़्त है
मिथ्या बातों में
न वक़्त बर्बाद करो

सुनो द्रोपदी
अब तुम मत श्रृंगार करो

उठावो खड़ग
और पापियों का संघार करो ||

प्रिया मिश्रा :)

Comments

Popular posts from this blog