मैं हूँ
निहारती हूँ मैं
अब भी तुम्हारी
दो आँखे
जिसमे सिर्फ तुम्हारा
प्रेम दीखता था
बदल गया है कितना
फीका सा हो गया
जिसमे पहले इंद्रधनुष दीखता था
अब वो सफ़ेद हो गया है
क्या बात है ?
क्या लौटा दिया तुमने
वो सारा प्रेम
जो मैंने तुमको दिया था
या सबकुछ समेट लिया खुद में ही
की अब तुम्हारा मन भी
कुछ काला - काला
दीखता है ||
अच्छा सुनो
मन मैला मत करो
सिर्फ शिकायते नहीं करुँगी तुमसे
एक वादा भी करुँगी
जब तुम्हारा मन उदाश हो
और लगे की अब
तुम अकेले हो
तो मैं रहूंगी तुम्हारे साथ
और चलूंगी फिर से
जब तक तुम्हे कोइ और नहीं मिल जाता
मैं हूँ
तुम चिंता ना करो
मैं ले लुंगी तुमसे
तुम्हारा बिष का प्याला
और रख दूंगी अपना
जीवन का मधुर स्वर |
तुम जब चाहे ले लेना
मेरी जीवन की
सारी कल्पना
और सजा लेना अपना घर
मैं तुम्हारे साथ हूँ
जब तक तुम्हे कोइ और नहीं मिल जाता
मैं हूँ
चुनने के लिए तुम्हारे राह के पत्थर
और रेत में लाने के लिए समुन्द्र
तुम्हे चिंता किस बात की
मैं हूँ ,
भर दूंगी तुम्हारा जीवन फिर से
रंगो से ,
और इस बार नहीं पूछूँगी
की वो रंग कहाँ गए
क्यों तुम्हारा मन काला हो गया
और सब कुछ लुटा के तुम सफ़ेद क्यों हुए ?
क्युकी मैं हूँ
फिर से भर दूंगी
तुम्हारे जीवन में रंग
और सजा दूंगी वही इंद्रधनुष ||
प्रिया मिश्रा :)
निहारती हूँ मैं
अब भी तुम्हारी
दो आँखे
जिसमे सिर्फ तुम्हारा
प्रेम दीखता था
बदल गया है कितना
फीका सा हो गया
जिसमे पहले इंद्रधनुष दीखता था
अब वो सफ़ेद हो गया है
क्या बात है ?
क्या लौटा दिया तुमने
वो सारा प्रेम
जो मैंने तुमको दिया था
या सबकुछ समेट लिया खुद में ही
की अब तुम्हारा मन भी
कुछ काला - काला
दीखता है ||
अच्छा सुनो
मन मैला मत करो
सिर्फ शिकायते नहीं करुँगी तुमसे
एक वादा भी करुँगी
जब तुम्हारा मन उदाश हो
और लगे की अब
तुम अकेले हो
तो मैं रहूंगी तुम्हारे साथ
और चलूंगी फिर से
जब तक तुम्हे कोइ और नहीं मिल जाता
मैं हूँ
तुम चिंता ना करो
मैं ले लुंगी तुमसे
तुम्हारा बिष का प्याला
और रख दूंगी अपना
जीवन का मधुर स्वर |
तुम जब चाहे ले लेना
मेरी जीवन की
सारी कल्पना
और सजा लेना अपना घर
मैं तुम्हारे साथ हूँ
जब तक तुम्हे कोइ और नहीं मिल जाता
मैं हूँ
चुनने के लिए तुम्हारे राह के पत्थर
और रेत में लाने के लिए समुन्द्र
तुम्हे चिंता किस बात की
मैं हूँ ,
भर दूंगी तुम्हारा जीवन फिर से
रंगो से ,
और इस बार नहीं पूछूँगी
की वो रंग कहाँ गए
क्यों तुम्हारा मन काला हो गया
और सब कुछ लुटा के तुम सफ़ेद क्यों हुए ?
क्युकी मैं हूँ
फिर से भर दूंगी
तुम्हारे जीवन में रंग
और सजा दूंगी वही इंद्रधनुष ||
प्रिया मिश्रा :)
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