मैंने एक तरफ़ा प्रेम देखा
मैंने दोतरफ़ा प्रेम भी देखा
दोनों तरफ हम ही खड़े थे
मैंने जितनी बार भी देखा
खुद को ही देखा

प्रिया मिश्रा :)

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मेरी प्रेमिका के शहर की
एक  ही बात निराली है
की उसके शहर में इंद्रधनुष दीखता है
हमेसा
बिना बादल
बिना सावन
ग्रीष्म ऋतू में भी
और मैं झूम उठता हूँ मोर सा
फिर ख्याल  आता है
मैं खाली हो गया हूँ
यहाँ खुद को भरने आ जाता हूँ
बावला सा ||

प्रिया मिश्रा :)

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एक खुद से नाराज व्यक्ति
दुसरो को नाराज कर जाता है
इसलिए पहले खुद को राजी कर लो
फिर ओरो से राजी होना
ये वक़्त नहीं तुम्हारा
कही और ध्यान भटकाने की
पहले खुद को ढूंढ लो
फिर शहर भर में लौ जलाना

प्रिया मिश्रा :)

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स्त्री मानहानि सह सकती है
मानहानि का दावा नहीं कर सकती
क्युकी हजार सवाल उसी पे आएंगे
क्युकी स्त्री उत्तरदाई है
उत्तर देने की ||

पुरुष मानहानि का दावा कर सकता है
क्युकी ये समाज उसे इजाजत देता है
प्रश्न पूछने का  ||

प्रिया मिश्रा :)

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