मैं रात की जुगनू  की तरह हूँ
तू दिन का सूरज है
तेरा मेरा मेल
संध्या की तरह
और किस्मत सुबह की ब्रम्हबेला
इन सबका मिलन कभी हुआ है एक साथ
तो फिर ,
रातरानी के पुष्पों को
सुबह की बेला में क्यों खिला हुआ देखने का स्वपन पालना
आँखे थक जाएँगी
और काजल बह जायेगा ||

प्रिया मिश्रा :)

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