जब मेरे दादा जी गुजरे थे
तब सबको बहुत रोना आया था
लेकिन मेरे पापा मेरी दादी को संभाल रहे थे
एक बेटे का अपने माँ के प्रति ये प्रेम देखकर मेरी आँखे भींग गयी थी
 लेकिन समझ से परे थी
क्या कोइ गया हुआ
किसी के सान्तवना में वापस आ सकता है ?
क्या सफ़ेद रंग लाल हो सकता है ?
मैंने बचपन में इस बड़े गहरे सत्य से
परिचय किया ||

लेकिन वही जब पापा फुट - फुट कर रो रहे थे
उनके कंधे पर किसी का हाथ न था
माँ भी खड़ी रो रही थी
बाप के जाने के बाप बेटा बड़ा हो जाता है
उसे कोइ नहीं समझा सकता
ममता का पाठ ||

अब मेरे पापा कुछ नहीं कहते
बस सोचते रहते है
काश मैं बच्चा ही रहता
बड़ा न होता
और अपने बच्चो को देखते रहते है
अब वो बहोत कम मुस्कुराते है
बस उन्हें इतना इत्मीनान है
उनके बच्चो का बाप है
और उनके बच्चे अभी बच्चे है ||

प्रिया मिश्रा :)

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