हम दरवाजे तक गए
लेकिन वापस आ गए
दरवाज खुला ना था
और कोइ बात नहीं थी
बस पुरानी जंजीरो में जंग लग गया था ||

हमने पौधों को पानी नहीं दिया
पानी बून्द - बून्द सुख गयी
और कोइ बात नहीं थी
वक़्त गुजर गया था
पौधा पानी का प्रेम ताकता
प्यासा सुख गया था ||

हमने कई दिनों से
अपनों से बात नहीं की
कही ऐसा न हो
वो पौधा भी सुख जाये
ना पानी मांगे
ना जंग ही छूट पाए
और रिश्तो का
पौधा सूखता चला जाये ||

प्रिया मिश्रा :)

Comments

Popular posts from this blog