मैं सोना चाहती हूँ
गोद में माँ के
एक ही करवट
और निहारना चाहती हूँ
उसका आँचल
उसकी लोरियाँ
सुनना चाहती हूँ
और खो जाना चाहती हूँ
उसी दुनिया में
और लेना चाहती हूँ
एक अंतिम साँस
क्या ये सब एक साथ संभव है


प्रिया मिश्रा :)

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तुम लिखना चाहो मेरे जीवन पे कोइ कहानी तो लिख लेना
लेकिन उसे इतिहास बनाओगे , हम क़तई बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे
क्युकी , जैसे तुम्हारी थाली में तुम्हे भिंडी अच्छी लगती है
वैसे ही अच्छे लगते हो तुम , मुझे मेरे जीवन में ||

प्रिया मिश्रा :)

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वो शख्स हमेसा याद आता है जिसे हम कभी याद नहीं आते
अजीब हैं ना
लेकिन हकीकत है
छुटकारा कैसे मिलेगा
आत्मदाह
या आत्मा समर्पण ||

प्रिया मिश्रा :)
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जब तुम नहीं देख पाये
की मैं कौन हूँ
मुझे कैसे दिखेगा की तुम कौन हो
तुमने खुद ही
लपेट रखा है एक आवरण
झूट का
और कहते हो
मैं तुम्हे जानना चाहता हूँ
संभव है ये
की अँधेरी रात में
बिना मशाल के
मशाल जलाया जाये
वो भी वहाँ, जहाँ
अँधेरा खुद ही ले बैठा हो सबकुछ अपने हाथ में ||

प्रिया मिश्रा :)

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अन्नत सपने देखे है मैंने बस इन कविताओ से
ये मेरे बच्चे जैसे है
जिन्हे मैं अपने आँचल में संजो के
थपकिया देना चाहती हूँ , और
देना चाहती हूँ
अन्नत आकाश का पंख
जिस से ये कर सके अनुभव
पुरे संसार का

प्रिया मिश्रा :)

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मैं सखी होना चाहती थी किसी  की 
मैं सती हो गयी किसी के नाम से ||

प्रिया मिश्रा :)

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