आओ  ज़्यादा  कुछ नहीं तो कुछ शब्द ही देके जाओ
तुमपे फिर कुछ लिखने को जी चाहता है ||

प्रिया मिश्रा :)

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हम एक दिन शाम बन के ढल जायेंगे
रात में कही खो जायेंगे
कल का सूरज जाने देखे या ना देखे कौन जाने
तो इतना अभिमान लेके कहाँ जायेंगे
तो रख दो अभिमान
स्वभिमान को ताख पे
की आज की जिंदगी अभी बाकी है
आओ मिल बैठ के कुछ बातें करते है

प्रिया मिश्रा :)

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जब फूस का घर जल रहा था
तब छप्पर वाले हस  रहे थे
जब छप्पर वालो का घर जला
तब छत वाले हस रहे थे
अब सब जल रहा है
आग ठहाके लगा रही है
और सब कुछ
धु - धु करके जल रहा है ||

प्रिया मिश्रा :)

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देह से प्रेम करने वाले
कभी आत्मा से प्रेम नहीं कर पाते |||

प्रिया मिश्रा :)

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