मैं स्वप्न देखती हूँ
और आँखों की अलसाई नींद से उठ के
फिर से देखती हूँ,
एक जिवंत स्वप्न ||

किसी मुशाफिर से कभी न पूछना
वो कहा को चला है , बस उसके जूते में
पैर डालना , एड़ियां अगर जमीं को छू जाये
तुम्हारी तो समझ लेना
उसने बड़ा लम्बा  सफर तय किया है ||

प्रिया मिश्रा :)

मुझे ढूंढ़ने की कोसिस
तुम्हारी हमेसा अधूरी रहेगी
ये मेरा श्राप है
हर अधूरी कोसिस को
और हर अधूरे आदमी को
जो छुप  के रहता है
और अधूरे वादे करता है

प्रिया मिश्रा :)

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वो रात भर का जलता दिया
सुबह की रौशनी में ग़ुम जायेगा
संभाल लो अभी वक़्त है ,
क्युकी सूरज फिर शाम ढल जायेगा ||

प्रिया मिश्रा :)





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