जितने वक़्त हम पुराने शब्दों की उधेड़ - बुन
में गवा देते है
उतने वक़्त में एक नया वक़्त लिखा जा सकता है ||

प्रिया मिश्रा :)

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मैंने अपने कुछ ही कविताओ में प्रेम को दर्शाया है
बाकी की कविताये खुद ही ढूंढ लेती है प्रेम को ||

प्रिया मिश्रा :)

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मैंने अपने कुछ ही कविताओ में प्रेम को दर्शाया है
बाकी की कविताये खुद ही ढूंढ लेती है प्रेम को ||

प्रिया मिश्रा :)
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मेरे शब्द मेरी साँसें
मेरी आत्मा है
और मैं हूँ
मुझे जानना है तो मेरी कविता पढ़ लो ||

प्रिया मिश्रा :)

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इश्क रूठा हुआ है
और बारिश मजे ले रही है |||

प्रिया मिश्रा :)

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वो लोग हमें हर पल याद आते रहते है
जो हमें कभी याद नहीं करते है
ये बिडंबना है या प्रेम
जो भी है
सुखद भी है
और दुखद भी
कहानी भी है
और कविता भी
इसका कोइ अंत नहीं
बस एक आवाज गूंजेगी और
मर जाएगी ||

प्रिया मिश्रा :)

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