मैं तुमसे अलग होके भी
अलग नहीं हूँ
तुम काशी जैसे
मैं गंगाजल जैसी
दोनों शिव को प्रिय है
इसलिए तुम महादेव भक्त हो
मैं महादेवी भक्त हूँ ||
प्रिया मिश्रा :)
___________________________________________________________________________________
कलम का कोइ दायरा नहीं होता
कागज छोटी पड़ जाती है
और लेखनी चलती जाती है
शब्द बिछते जाते है
कहानी बनती जाती है
लेकिन शालीनता फिर भी रहती है
क्युकी कलम का कोइ दायरा नहीं होता
कलम का उत्तरदायित्व होता है ||
प्रिया मिश्रा :)
____________________________________________________________________________________
एक कवित्री ने भगवान् से प्राथना की
प्रभु मुझे कोइ ऐसा साथी देना
जो मेरी लेखनी को सराहे ना सराहे
कोइ बात नहीं |
बस मेरे बिन बोले
मेरे लिए कागज़ -कलम लाता रहे ||
प्रिया मिश्रा :)
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अलग नहीं हूँ
तुम काशी जैसे
मैं गंगाजल जैसी
दोनों शिव को प्रिय है
इसलिए तुम महादेव भक्त हो
मैं महादेवी भक्त हूँ ||
प्रिया मिश्रा :)
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कलम का कोइ दायरा नहीं होता
कागज छोटी पड़ जाती है
और लेखनी चलती जाती है
शब्द बिछते जाते है
कहानी बनती जाती है
लेकिन शालीनता फिर भी रहती है
क्युकी कलम का कोइ दायरा नहीं होता
कलम का उत्तरदायित्व होता है ||
प्रिया मिश्रा :)
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एक कवित्री ने भगवान् से प्राथना की
प्रभु मुझे कोइ ऐसा साथी देना
जो मेरी लेखनी को सराहे ना सराहे
कोइ बात नहीं |
बस मेरे बिन बोले
मेरे लिए कागज़ -कलम लाता रहे ||
प्रिया मिश्रा :)
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