एक मैंने कहा इसलिए तुम मुस्कुरा दो
ये कोइ वजह नहीं मुस्कुराने की ||
प्रिया मिश्रा :)
____________________________________________________________________________________
जिंदगी जीने की वजह ढूंढ़ते -ढूंढ़ते
मौत के करीब आ गए
तब एहसास हुआ
जरा सा मुस्कुराना ही तो था ||
प्रिया मिश्रा :)
_________________________________________________________________________________-
कोइ भी व्यक्ति तब विद्रोही घोसित किया जाता है
जब उसकी बात में सचाई हो
और वो उसे प्रकट करना जानता हो ||
प्रिया मिश्रा :)
____________________________________________________________________________________
कोइ भी व्यक्ति तब विद्रोही घोसित किया जाता है
जब उसकी बात में सचाई हो
और वो उसे प्रकट करना जानता हो ||
प्रिया मिश्रा :)
_____________________________________________________________________________________
मैं अपने जीवन के आनंद के आँगन के
सारे पुष्प तुम्हे सौपती हूँ
लेकिन एक वचन दो इन्हे
रौंदोगे नहीं
प्रिया मिश्रा :)
__________________________________________________________________________________
कैसे मान लूँ की अभी - अभी जो बिश्वाश के अंकुर फूटे है
वो टूटेंगे नहीं
अक्सर बिश्वाश में आघात होता है
बड़ा गहरा
अनदेखा
अनजाना
और अविश्वसनीय ||
प्रिया मिश्रा
_________________________________________________________________________________
तुम्हारे लिया कहानी ख़त्म है
मेरे लिए चुनौती शुरू हुई है
देखते है
जाते हुए कदमो की निशाँ रह जायेंगे
या लौटोगे तुम फिर से ||
प्रिया मिश्रा :)
ये कोइ वजह नहीं मुस्कुराने की ||
प्रिया मिश्रा :)
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जिंदगी जीने की वजह ढूंढ़ते -ढूंढ़ते
मौत के करीब आ गए
तब एहसास हुआ
जरा सा मुस्कुराना ही तो था ||
प्रिया मिश्रा :)
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कोइ भी व्यक्ति तब विद्रोही घोसित किया जाता है
जब उसकी बात में सचाई हो
और वो उसे प्रकट करना जानता हो ||
प्रिया मिश्रा :)
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कोइ भी व्यक्ति तब विद्रोही घोसित किया जाता है
जब उसकी बात में सचाई हो
और वो उसे प्रकट करना जानता हो ||
प्रिया मिश्रा :)
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मैं अपने जीवन के आनंद के आँगन के
सारे पुष्प तुम्हे सौपती हूँ
लेकिन एक वचन दो इन्हे
रौंदोगे नहीं
प्रिया मिश्रा :)
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कैसे मान लूँ की अभी - अभी जो बिश्वाश के अंकुर फूटे है
वो टूटेंगे नहीं
अक्सर बिश्वाश में आघात होता है
बड़ा गहरा
अनदेखा
अनजाना
और अविश्वसनीय ||
प्रिया मिश्रा
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तुम्हारे लिया कहानी ख़त्म है
मेरे लिए चुनौती शुरू हुई है
देखते है
जाते हुए कदमो की निशाँ रह जायेंगे
या लौटोगे तुम फिर से ||
प्रिया मिश्रा :)
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