वो चेहरे से खूबसूरत नहीं है
लेकिन उसकी दो खूबसूरत हाथ
हमेसा त्यार रहते है
किसी की खुसी के लिए
प्रिया मिश्रा :)
********************************************************************************
उसका आना और जाना
दोनों नियति के हाथ में थे
मेरे हाथ में सिर्फ इन्तजार था
और ये मेरे लिए एक रोजगार था
रोजगार भी ऐसा जिसमे
गुजारा भत्ता कुछ नहीं
बस आँखों में सपनो की कमाई थी
और आँगन में उसके लगाए कुछ फूलो की महक ||
प्रिया मिश्रा :)
___________________________________________________________________________________
मैं जिस सुबह तुमसे न मिलूं
समझना मेरी रात गुजर गयी
अब सबेरा एक नया होगा
वहां मिलेंगे
सुबह की खिली धुप बनकर ||
प्रिया मिश्रा :)
__________________________________________________________________________________
वादे न किया करो
निभाए नहीं जाते तो
किसी का भरोसा टूट जायेगा
तुम्हारा कुछ न जायेगा
उस से उसका
खुदा रूठ जायेगा ||
प्रिया मिश्रा :)
__________________________________________________________________________________
मैं एक सत्य के परीक्षण में हूँ
एक झूट जिसने मुझे छला
मैं उसके बिपरीत
जाके कुछ ढूंढ़ना चाहती हूँ
मैं देखना चाहती हूँ
की सत्य की परिभासा क्या है
और जो है वो
प्रेम में परिभासित है या नहीं
क्युकी मैंने देखा है
महसूस किया है
की सत्य की परिभासा बदल जाती है
जब बात उठती है
की अब प्रेम निभाना है ||
प्रिया मिश्रा
__________________________________________________________________________________
रात के अँधेरे में लोग
सेंध लगाते हैं
और दिन के अँधेरे में
सपने चुराते है
ये मतलबी दुनिया है
यहाँ सिर्फ मतलब निकाले जाते है ||
प्रिया मिश्रा :)
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लेकिन उसकी दो खूबसूरत हाथ
हमेसा त्यार रहते है
किसी की खुसी के लिए
प्रिया मिश्रा :)
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उसका आना और जाना
दोनों नियति के हाथ में थे
मेरे हाथ में सिर्फ इन्तजार था
और ये मेरे लिए एक रोजगार था
रोजगार भी ऐसा जिसमे
गुजारा भत्ता कुछ नहीं
बस आँखों में सपनो की कमाई थी
और आँगन में उसके लगाए कुछ फूलो की महक ||
प्रिया मिश्रा :)
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मैं जिस सुबह तुमसे न मिलूं
समझना मेरी रात गुजर गयी
अब सबेरा एक नया होगा
वहां मिलेंगे
सुबह की खिली धुप बनकर ||
प्रिया मिश्रा :)
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वादे न किया करो
निभाए नहीं जाते तो
किसी का भरोसा टूट जायेगा
तुम्हारा कुछ न जायेगा
उस से उसका
खुदा रूठ जायेगा ||
प्रिया मिश्रा :)
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मैं एक सत्य के परीक्षण में हूँ
एक झूट जिसने मुझे छला
मैं उसके बिपरीत
जाके कुछ ढूंढ़ना चाहती हूँ
मैं देखना चाहती हूँ
की सत्य की परिभासा क्या है
और जो है वो
प्रेम में परिभासित है या नहीं
क्युकी मैंने देखा है
महसूस किया है
की सत्य की परिभासा बदल जाती है
जब बात उठती है
की अब प्रेम निभाना है ||
प्रिया मिश्रा
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रात के अँधेरे में लोग
सेंध लगाते हैं
और दिन के अँधेरे में
सपने चुराते है
ये मतलबी दुनिया है
यहाँ सिर्फ मतलब निकाले जाते है ||
प्रिया मिश्रा :)
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