हम आसूँ  बहाएंगे
तो कोइ कन्धा चाहिए होगा

तो चलो आज आँखों में काजल भर ले
अब बस चेहरे पे पूर्णिमा और आँखों में अमावश होगा

ना सावन होगा
न वर्षा होगी
ना इंद्रधनुष की कोइ चाहत होगी ||


प्रिया मिश्रा :)

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मुझे तुमसे कोइ फ़िल्मी हीरो वाला इश्क नहीं है
प्रेम करता हूँ
प्रेम निभाता हूँ
कुछ नहीं कह पाता गुलजार की गज़लों की तरह
लेकिन कृष्णा की तरह
तुम्हे और सिर्फ तुम्हे ही
अपनी रुक्मणि मानता हूँ

प्रिया मिश्रा :)

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मैं अपने भाई को देखती हूँ
और सोचती हूँ
ये कितना बड़ा हो गया है
अपनी सारी जिम्मेदारियाँ समझने लगा है
ये उम्र में मुझसे छोटा है
लेकिन विदा हो गया है
इसका ससुराल शहर की वो भाग - दौड़ है
और ये घूमता हुआ इधर - उधर सा
एक सिपाही जो
तत्पर है
रक्षा हेतु
अपनी कर्मभूमि की
अपनी धर्मभूमि की
जो इसका आँगन है
एक भारतभूमि का छोटा और बहोत छोटा भूभाग
लेकिन बड़ा है उसके लिए
जो बच्चा अब बड़ा हो गया है ||

प्रिया मिश्रा :)

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प्रेम कोइ बंधन नहीं है
 अगर सहर्ष स्वकार कर लो तो
एक  आनंद है
एक बेदना है
एक इन्तजार है
इसमें सब कुछ स्वीकार है
लेकिन कोइ बंधन नही हैं
अगर सहर्ष स्वीकार कर लो तो ||

प्रिया मिश्रा :)

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