ये हाथो में हाथ काफी महंगा पड़ जाता है
एक वक़्त के बाद हाथ खाली रह जाता है
बांधना है तो बांध लो खुद को ही
खुले सपनो के लिए पूरा आसमान भी छोटा पड़ जाता है
यूँ ठहर के किसी का इन्तजार मत करना
जाने वाले लौटे ऐसा मौसम कभी - कभी ही आता है ||
प्रिया मिश्रा :)
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आदमी कितना आमिर है ये उसके अर्थी के पीछे के लोग बताते है
कर्म से आमिर हो तो भी भीड़ बढ़ती है
धन से आमिर हो तो भी भीड़ बढ़ती है
प्रिया मिश्रा :)
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मैं पेड़ के साख से लगे पत्ते देखती हूँ
कैसे बेरंग से होक गिर जाते है
रंग बदलने पर हाथ
नियति अपना रंग बदल लेती है
प्रिया मिश्रा :)
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संसार की पीड़ा ये है को वो बता नहीं सकती
को वो माया है
प्रिया मिश्रा :)
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हर कोइ पूरा नहीं मरता
वो थोड़ा जिन्दा रह जाता है
किसी की यादो में
किसी की बातों में
अनहोनी चाहें कुछ भी हो
होनी तो यही है
की यादें और बातें कभी नहीं मरती
प्रिया मिश्रा :)
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प्रेम हमेसा ही खंडित रहा है
कुछ पूर्ण नहीं होता इसमें
तो फिर मैं कैसे लिख दूँ
एक पूर्ण एक अखंडित
कविता प्रेम पर ||
प्रिया मिश्रा :)
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बचपन की कविताये बहोत ख़ास होती है
उन्हें ही धरोराह के रुप में रखना चाहिए
क्युकी बड़े होने पर शब्द भी बड़े हो जाते है
फिर कहाँ मिलता है
वो प्रेम उस कागज को
जो आड़ी - टेढ़ी कविताओ में छिपा रहता था
कागज एक पिता की भांति आज भी उन्हें छूना चाहता है
और लेखनी माँ की भांति आज भी उन्हें रचना चाहती है
प्रिया मिश्रा :)
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वक़्त बदल के वक़्त पे हस्ता है
ये वक़्त की चाल है
वक़्त भी नहीं समझता है
प्रिया मिश्रा :)
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पिता को महसूस करना ऐसा है जैसे
घर के हरेक कोने में प्रकाश फैला हो
माँ को महसूस करना ऐसा है जैसे
नीव पे कोइ घर टिका हो
प्रिया मिश्रा :)
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जहाँ प्रेम की बात चलती हो
वहाँ
मैं चुप ही रहती हूँ
क्युकी सच्चा प्रेम शब्द नहीं
मौन में मुस्कान ढूंढ़ता है
और सच्चा प्रेमी हरेक परिस्थिति में प्रेम का मार्ग ढूंढ ही लेता है
प्रिया मिश्रा :)
जहा सच्चा प्रेम
वहाँ सच्ची भक्ति
जहाँ भक्ति वही शक्ति
जहाँ शक्ति , वहाँ शिव
जहाँ शिव , वहाँ गंगा
जहाँ गंगा , वहाँ पवित्रता
जहाँ पवित्रता , वहाँ लक्ष्मी
जहाँ लक्ष्मी , वहाँ विष्णु
जहाँ विष्णु , वहाँ माधव
जहाँ माधव , वहाँ राधा
जहाँ राधा , वहाँ प्रेम
प्रिया मिश्रा :)
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जब मृत्यु आएगी तब आएगी
अभी क्यों ना जिन्दा हूँ तो मुस्कुरा लूँ
क्यों ना कुछ शब्द चुनु और एक कविता बना लूँ ||
प्रिया मिश्रा :)
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एक वक़्त के बाद हाथ खाली रह जाता है
बांधना है तो बांध लो खुद को ही
खुले सपनो के लिए पूरा आसमान भी छोटा पड़ जाता है
यूँ ठहर के किसी का इन्तजार मत करना
जाने वाले लौटे ऐसा मौसम कभी - कभी ही आता है ||
प्रिया मिश्रा :)
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आदमी कितना आमिर है ये उसके अर्थी के पीछे के लोग बताते है
कर्म से आमिर हो तो भी भीड़ बढ़ती है
धन से आमिर हो तो भी भीड़ बढ़ती है
प्रिया मिश्रा :)
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मैं पेड़ के साख से लगे पत्ते देखती हूँ
कैसे बेरंग से होक गिर जाते है
रंग बदलने पर हाथ
नियति अपना रंग बदल लेती है
प्रिया मिश्रा :)
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संसार की पीड़ा ये है को वो बता नहीं सकती
को वो माया है
प्रिया मिश्रा :)
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हर कोइ पूरा नहीं मरता
वो थोड़ा जिन्दा रह जाता है
किसी की यादो में
किसी की बातों में
अनहोनी चाहें कुछ भी हो
होनी तो यही है
की यादें और बातें कभी नहीं मरती
प्रिया मिश्रा :)
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प्रेम हमेसा ही खंडित रहा है
कुछ पूर्ण नहीं होता इसमें
तो फिर मैं कैसे लिख दूँ
एक पूर्ण एक अखंडित
कविता प्रेम पर ||
प्रिया मिश्रा :)
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बचपन की कविताये बहोत ख़ास होती है
उन्हें ही धरोराह के रुप में रखना चाहिए
क्युकी बड़े होने पर शब्द भी बड़े हो जाते है
फिर कहाँ मिलता है
वो प्रेम उस कागज को
जो आड़ी - टेढ़ी कविताओ में छिपा रहता था
कागज एक पिता की भांति आज भी उन्हें छूना चाहता है
और लेखनी माँ की भांति आज भी उन्हें रचना चाहती है
प्रिया मिश्रा :)
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वक़्त बदल के वक़्त पे हस्ता है
ये वक़्त की चाल है
वक़्त भी नहीं समझता है
प्रिया मिश्रा :)
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पिता को महसूस करना ऐसा है जैसे
घर के हरेक कोने में प्रकाश फैला हो
माँ को महसूस करना ऐसा है जैसे
नीव पे कोइ घर टिका हो
प्रिया मिश्रा :)
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जहाँ प्रेम की बात चलती हो
वहाँ
मैं चुप ही रहती हूँ
क्युकी सच्चा प्रेम शब्द नहीं
मौन में मुस्कान ढूंढ़ता है
और सच्चा प्रेमी हरेक परिस्थिति में प्रेम का मार्ग ढूंढ ही लेता है
प्रिया मिश्रा :)
जहा सच्चा प्रेम
वहाँ सच्ची भक्ति
जहाँ भक्ति वही शक्ति
जहाँ शक्ति , वहाँ शिव
जहाँ शिव , वहाँ गंगा
जहाँ गंगा , वहाँ पवित्रता
जहाँ पवित्रता , वहाँ लक्ष्मी
जहाँ लक्ष्मी , वहाँ विष्णु
जहाँ विष्णु , वहाँ माधव
जहाँ माधव , वहाँ राधा
जहाँ राधा , वहाँ प्रेम
प्रिया मिश्रा :)
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जब मृत्यु आएगी तब आएगी
अभी क्यों ना जिन्दा हूँ तो मुस्कुरा लूँ
क्यों ना कुछ शब्द चुनु और एक कविता बना लूँ ||
प्रिया मिश्रा :)
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