प्रकृति की इस सुंदर चित्रण को देख के
मन में प्रश्न उठ आया है
ये जो माला गुँथी गयी है
और ये जो मँडप
सजा है इसको क्या समझू मैं
क्या ये संकेत है
फिर से मिलने का
प्रकृति और विष्णु का
या फिर कोइ मोहक कल्पना
जो कल्पना से भी परे है ||
क्या समझूँ मैं की ये
शिव की कोइ मोहक छबि है
श्रावण का त्वोहार है
ये फिर शिवा के गले का हार है
जो उपहार है प्रकृति का
शिवा को
शिव को
उनके प्रेम को
और संकेत है
की हे विष्णु
अभी प्रेम बाकि है मुझमे
चाहे मैं गुजरी जिन परिस्थितयों से
न मेरा प्रेम मरा
नाही मेरा ममत्वा
प्रिया मिश्रा :)
मन में प्रश्न उठ आया है
ये जो माला गुँथी गयी है
और ये जो मँडप
सजा है इसको क्या समझू मैं
क्या ये संकेत है
फिर से मिलने का
प्रकृति और विष्णु का
या फिर कोइ मोहक कल्पना
जो कल्पना से भी परे है ||
क्या समझूँ मैं की ये
शिव की कोइ मोहक छबि है
श्रावण का त्वोहार है
ये फिर शिवा के गले का हार है
जो उपहार है प्रकृति का
शिवा को
शिव को
उनके प्रेम को
और संकेत है
की हे विष्णु
अभी प्रेम बाकि है मुझमे
चाहे मैं गुजरी जिन परिस्थितयों से
न मेरा प्रेम मरा
नाही मेरा ममत्वा
प्रिया मिश्रा :)
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