"अंकित कर दूँ तेरे नाम को "
शब्दों को अंकित कर के
मैं अंकित कर दू तेरे नाम को
वो भी शिला पे अंकित हो जायेगा
लोग आएंगे पढ़ने
प्रेम - प्रसंग की
अंकित भासा
कविता के गुफ़ा की दीवारों पर
तू अंकित हो जायेगा
मैं कोइ अशोक नहीं
न कोइ शिलालेख बना पाऊँगी
तेरे नाम को अंकित कर
मैं अमर कर जाउंगी ||
फिर तुम
रहो कही भी
एक नाम अंकित होगा
मेरी कविताओ में
इस काल से
उस काल तक
समय की सिमा से बाहर
और परे ||
प्रिया मिश्रा :)
शब्दों को अंकित कर के
मैं अंकित कर दू तेरे नाम को
वो भी शिला पे अंकित हो जायेगा
लोग आएंगे पढ़ने
प्रेम - प्रसंग की
अंकित भासा
कविता के गुफ़ा की दीवारों पर
तू अंकित हो जायेगा
मैं कोइ अशोक नहीं
न कोइ शिलालेख बना पाऊँगी
तेरे नाम को अंकित कर
मैं अमर कर जाउंगी ||
फिर तुम
रहो कही भी
एक नाम अंकित होगा
मेरी कविताओ में
इस काल से
उस काल तक
समय की सिमा से बाहर
और परे ||
प्रिया मिश्रा :)
अति सुन्दर पंक्तिया
ReplyDeletethank you :)
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