मुझे  नहीं पता की आग कैसे लगाई जाती है
मुझे बस इतना पता है
जहाँ आग लगती है
वहाँ राख रह जाता है

प्रिया मिश्रा :)
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आपका वक़्त बदलने लगा है कैसे पता चलेगा
अगर वक़्त अच्छा है तो
सब गले मिलेंगे
अगर नहीं तो
वो आदमी भी किनारा कर लेगा जो
आपको करीबी मित्र नहीं
आपको अपनी अभिमान  बुलाते थे 
 कुछ वक़्त  को जानने के लिए इन 
घड़ियों की  जरुरत नहीं
आदमी की पहचान जरुरी है
क्युकी आदमी का कोइ  ब्रांड नहीं होता
औकात होती है 
जो समय के अनुशार बदल जाती हैं
आपकी भी मेरी भी ||

प्रिया मिश्रा :)

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प्यास लगी होगी तभी उसने रास्ता पूछा होगा
किसी ने अंधे कुए को दिखा के
एक मासूम से आँख की जान ले ली
 एक मासूम प्यास की जान ले ली ||


प्रिया मिश्रा :)
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 पासा उल्टा नहीं पड़ा है
मैंने  फेकें ही नहीं अभी पासें
क्युकी मुझे पता है
जिंदगी एक दिन फेकेगी
कुछ ऐसा
जिससे ठहाके गुम हो जायेंगे
आज मैं लाचार कल कोइ  और होगा
समय है
 इसे बदलना ही है

प्रिया मिश्रा :)
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आदमी स्वयं के हाथो मारा जाता है




प्रिया मिश्रा :)
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 पिता आधार नहीं नीव है जीवन का
प्रिया मिश्रा :)

हमसफ़र सफर में आके उसे अच्छा भी बना सकता है
और आपको सफर से भटका भी सकता है
तो सफर पे खुद अकेले चलना सीखे
हमसफ़र न ढूंढे
चलते रहे मिल जायेगा कोइ राह में
हमसफ़र , तू अपना सफर तय कर वो मुसाफिर ||

प्रिया मिश्रा :)
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