कभी किसी सागर को सूखते हुए देखा है
मैंने देखा है
सागर को बून्द बन के सूखते हुए
रेत में
कैसे खा जाती है रेत उसे
सागर आता है बड़े जोश में
और वही पथरा जाता है
लोगो को लगता है रेत ठंडा हो गया
समुन्द्र को पता है
रेत उसे खा गयी ||
प्रिया मिश्रा :)
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तुमने जो कहा था मैंने सुना था
बस इतना सा ही मेरा गुनाह था ||
अब बांध लो गठरी अपने वादों की
वादा भी तो खून में सना था
वो रेत के टीले पर जो सपने मैंने गाड़े थे
उन्हें हवा उड़ा ले गयी
ये सब चुपके - चुपके हुए था
किसी ने ना कुछ कहाँ था
ना किसी ने कुछ सुना था ||
प्रिया मिश्रा :)
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मैंने चखा ही नहीं रोटियों का स्वाद कुछ महीनो से
इसलिए सायद मुझे भूख जायदा लगती है ||
प्रिया मिश्रा :)
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लोग बात कर के बात बदल देते है
ये अंदाज है आजकल बात करने का
संभल के रहना , ये बातो का सिलसिला
किसी की खामोसी का सबब ना बन जाये
की , आज भी मुस्कुराते चेहरे के कातिल बहोत है ||
प्रिया मिश्रा :)
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तुमने मेरी जिंदगी में आपकर मेरी आदते नहीं बदली
मुझे बदल दिया
पहले मैं ज़िन्दा थी ,दिल से
तुमने उसे भी पत्थर कर दिया
अब कहते हो ,
पत्थर से दीखते हो
मैं क्या करूँ मोम का पुतला भी तो तुमने
धीरे - धीरे गलाया
और उसे भी पानी कर दिया
अब पानी भी धुप में सुख ही जाएगी
की धुप भी तुमने इतना जायदा कर दिया
प्रिया मिश्रा :)
**********************************************************************************
मेरे लिए ना तुम हो
ना मैं हूँ
एक कहानी है जो पन्ने पर लिखी गयी है
पन्ना फड़फड़ा रहा है
और आंधी बहोत तेज है ||
प्रिया मिश्रा :)
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लोग जिंदादिल लोगो से मिलकर उनका दिल निकाल लेते है
जरुरी भी है
कोइ अपने सर क़त्ल का इल्जाम नहीं लेना चाहता ||
प्रिया मिश्रा :)
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पानी में आग लगा के देखना
बहोत तेज लगती है
जैसे , पानी चाहती हो जल जाना |||
प्रिया मिश्रा :)
मैंने देखा है
सागर को बून्द बन के सूखते हुए
रेत में
कैसे खा जाती है रेत उसे
सागर आता है बड़े जोश में
और वही पथरा जाता है
लोगो को लगता है रेत ठंडा हो गया
समुन्द्र को पता है
रेत उसे खा गयी ||
प्रिया मिश्रा :)
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तुमने जो कहा था मैंने सुना था
बस इतना सा ही मेरा गुनाह था ||
अब बांध लो गठरी अपने वादों की
वादा भी तो खून में सना था
वो रेत के टीले पर जो सपने मैंने गाड़े थे
उन्हें हवा उड़ा ले गयी
ये सब चुपके - चुपके हुए था
किसी ने ना कुछ कहाँ था
ना किसी ने कुछ सुना था ||
प्रिया मिश्रा :)
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मैंने चखा ही नहीं रोटियों का स्वाद कुछ महीनो से
इसलिए सायद मुझे भूख जायदा लगती है ||
प्रिया मिश्रा :)
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लोग बात कर के बात बदल देते है
ये अंदाज है आजकल बात करने का
संभल के रहना , ये बातो का सिलसिला
किसी की खामोसी का सबब ना बन जाये
की , आज भी मुस्कुराते चेहरे के कातिल बहोत है ||
प्रिया मिश्रा :)
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तुमने मेरी जिंदगी में आपकर मेरी आदते नहीं बदली
मुझे बदल दिया
पहले मैं ज़िन्दा थी ,दिल से
तुमने उसे भी पत्थर कर दिया
अब कहते हो ,
पत्थर से दीखते हो
मैं क्या करूँ मोम का पुतला भी तो तुमने
धीरे - धीरे गलाया
और उसे भी पानी कर दिया
अब पानी भी धुप में सुख ही जाएगी
की धुप भी तुमने इतना जायदा कर दिया
प्रिया मिश्रा :)
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मेरे लिए ना तुम हो
ना मैं हूँ
एक कहानी है जो पन्ने पर लिखी गयी है
पन्ना फड़फड़ा रहा है
और आंधी बहोत तेज है ||
प्रिया मिश्रा :)
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लोग जिंदादिल लोगो से मिलकर उनका दिल निकाल लेते है
जरुरी भी है
कोइ अपने सर क़त्ल का इल्जाम नहीं लेना चाहता ||
प्रिया मिश्रा :)
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पानी में आग लगा के देखना
बहोत तेज लगती है
जैसे , पानी चाहती हो जल जाना |||
प्रिया मिश्रा :)
Waah
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ReplyDeletethank you :)
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