"नींद"
सुकून से जब माँ के आँचल में चुप कर सोती थी
तब वो नींद होती थी , अब करवटो में रात गुजरती है ||
काम में उलझ गए , दुनियादारी में बड़े हो गए
उबासी तो आती है , नींद नहीं आती
आज कल दवाईयों पर पलके बंद होती है
रात होती है , शाम नहीं होती ||
जरा सी वक़्त निकाल के सोचती हूँ
वक़्त को भी वक़्त दे दूँ
मिल लूँ माँ से ,
बड़े दिनों बाद उसकी बेटी से मिला दूँ ||
इस होली माँ के चेहरे पे एक प्यारा सा मुस्कान ला दूँ
इस होली मैं एक सुकून की नींद ले लू ||
प्रिया मिश्रा :)
सुकून से जब माँ के आँचल में चुप कर सोती थी
तब वो नींद होती थी , अब करवटो में रात गुजरती है ||
काम में उलझ गए , दुनियादारी में बड़े हो गए
उबासी तो आती है , नींद नहीं आती
आज कल दवाईयों पर पलके बंद होती है
रात होती है , शाम नहीं होती ||
जरा सी वक़्त निकाल के सोचती हूँ
वक़्त को भी वक़्त दे दूँ
मिल लूँ माँ से ,
बड़े दिनों बाद उसकी बेटी से मिला दूँ ||
इस होली माँ के चेहरे पे एक प्यारा सा मुस्कान ला दूँ
इस होली मैं एक सुकून की नींद ले लू ||
प्रिया मिश्रा :)
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