"गुड़िया टूट गयी "

दुनिया की खिलौना थी जो
वो गुड़िया आज टूट गयी
मेरी बिटिया मुझसे रूठ गयी ||

लाल चुन्नी माथे पे उसके
मेहँदी हाथो में उसके
देखा था ख्वाब एक
डोली में जाने के उसके
हाय , रे निर्मोही
रावण सीता हर ले गया
क्यों ना वो मेरे प्राण ले गया
एक बाप की आज दुनिया लूट गयी
मेरी बिटिया मुझसे रूठ गयी ||

बून्द - बून्द टपकता रहा
आसूँ खून बनके रिश्ता रहा
ना दया आई उसको
दरिंदा भेड़िया उसको नोचता रहा
उसकी भूक की  बलि चढ़ गयी
एक कली पैरो तले रौंदती रही
चटका मिट्टी का मासूम बचपन
एक सुराही फिर से टूट गयी
मेरी बिटिया मुझसे रूठ गयी ||

अब जला हैं मशाल
तब कहा था किसी को मलाल
सब थे अपने घरो में
मौन था,  कौरव समाज
आज भी पापी सांस ले रहा
कहाँ कोइ फंदा उसके प्राण ले रहा
जो थी आस , थोड़ी सी  बाकि
वो भी अब टूट गयी
मेरी बिटिया मुझसे रूठ  गयी ||


दुनिया की खिलौना थी जो
वो गुड़िया आज टूट गयी
मेरी बिटिया मुझसे रूठ गयी ||

प्रिया मिश्रा :)

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