"चाँद तारे तोड़ लाऊँ "

मैंने उस से भरोसे की बात कही थी
वो बात - बात में कहता
चाँद - तारे तोड़ लाऊँ

कैसे समझाती
कहा फलक में चाँद
प्यार में डूबा रहता है
लाखो होंगे दीवाने उसके
पर वो  तो तनहा होता है
कहाँ तारो की टोली
बारात जैसी लगती है
ख़ाली  आसमान में
कहाँ चांदनी की
पिया की डोली सजती हैं
तू रहने दे
ना ला
चाँद , ना ला तारे
एक भरोसा का
गुलदस्ता ला
मैं वारे जाऊँ तेरे
और वो कहता
फिर से ,
ला दू तुझे
वो चाँद वो तारे ||

मैं खामोश सी उसकी आँखों में
वो चाँद ढूंढा करती थी
जो वो रोज लाया करता था
और वो कहता ,
बोल ना ,
आसमा की चुन्नी बना के
भर दूँ तेरे मांग में
वो चाँद वो तारे
और मैं बहकी उसकी बातों में
वादे और भरोसे की बात ही भूल जाती
और उसके सुर में ताल मिलती
कहती ना रहने दे ,
आसमान की चुन्नी ,
तू तोड़ ला
वो चाँद वो तारे
फिर खाली आसमान के तले
अँधेरी रातो में दो दीवानो की
पागलपन वाली हसीं गूंजा करती थी
जो आज सयाने पन में ग़ुम गयी है ||

प्रिया मिश्रा :)

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