मुझसे कोइ भूल नहीं हुई
जो पछतावा करू
प्रेम किया हैं
प्रेम न पाप है
ना भूल है ||
मैं कोइ राह नहीं भटकी
जो लौट आऊँ
प्रेम किया है
प्रेम ना गलत राह है
ना कोइ गलत मंजिल है ||
मैं कोइ मंजिल नहीं ढूंढ रही
जो , ना मिले तो टूट जाऊँ
प्रेम किया है
प्रेम ना मंजिल है
ना रास्ता है ||
मैंने कोइ नदियों की गहराई नहीं मापी
प्रेम किया हैं
प्रेम सागर की मोती हैं
कोइ नदियों का सीपी नहीं
जो , टूट जाये
खाली सा होके ||
मुझसे कोइ भूल नहीं हुई
जो पछतावा करू
प्रेम किया है
प्रेम ना पाप है
ना भूल है ||
प्रिया मिश्रा :)
जो पछतावा करू
प्रेम किया हैं
प्रेम न पाप है
ना भूल है ||
मैं कोइ राह नहीं भटकी
जो लौट आऊँ
प्रेम किया है
प्रेम ना गलत राह है
ना कोइ गलत मंजिल है ||
मैं कोइ मंजिल नहीं ढूंढ रही
जो , ना मिले तो टूट जाऊँ
प्रेम किया है
प्रेम ना मंजिल है
ना रास्ता है ||
मैंने कोइ नदियों की गहराई नहीं मापी
प्रेम किया हैं
प्रेम सागर की मोती हैं
कोइ नदियों का सीपी नहीं
जो , टूट जाये
खाली सा होके ||
मुझसे कोइ भूल नहीं हुई
जो पछतावा करू
प्रेम किया है
प्रेम ना पाप है
ना भूल है ||
प्रिया मिश्रा :)

नि:शब्द
ReplyDeleteसुंदर रचना जी 🙏 👍 ♥️
ReplyDeletethank you aap dono ko :)
ReplyDeleteBohot sunder
Deletehttps://www.youtube.com/watch?v=2AkgbHVQ1ng
ReplyDeleteNice poem mujhe bhi likhne ka sounk h isliye mene bhi blogging start ki h aap chahe to ek bar visit kr skti h
ReplyDeleteInsanijazbat.blogspot.com