मौसम को बदलने से रोक लो
की इतनी आँधियो में फिर से कोइ बेघर ना हो जाये

है आग लगी
इस आग को ना देखो यूँ
की लपटे तुम्हारे घर तक ना चली जाये
जो फैलेगी ये आग
हर एक मकान होगा
कही तेरा भी आशियाना ना जल जाये ||

मौसम को बदलने से रोक लो
की इतनी आँधियो में फिर से कोइ बेघर ना हो जाये ||

ये दौर ही चल रहा  है
दुसरो की  जेबें टटोलने का
जरा संभल के रहना
कही तुम्हारा,
खुद का जमीर ना लूट जाये ||

मौसम  को बदलने से रोक लो
की इतनी आँधियो में फिर से कोइ बेघर ना हो जाये ||

देख के कीचड़ अपने शहर का मुँह न मोड़ लेना
उस कीचड़ में कमल उगाने का एक फर्ज अदा कर जाना
जो कमल खिलेगा तो
उसकी सुंदरता  तुम्हे भी सुन्दर बनाएगी
जो कीचड़ उड़ा
तो दाग लग जायेगा
जो एक बार दामन पे दाग लग जायेगा
तो उम्र उसमे ही गुजर जाएगी
संभाल के रखना खुद को
उस शहर के कीचड़ से
की कही तू भी मैला ना हो जाये ||

मौसम को बदलने से रोक लो
की इतनी आँधियो में फिर से कोइ बेघर ना हो जाये ||

प्रिया मिश्रा :)


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