ये ढाई अक्षर का
प्यार शब्द
आदमी को बिश्वाश की नीव देता हैं
और ये  बिश्वाश जब टूटता हैं
तो आदमी को खोखला कर देता हैं

दोष न प्यार का हैं
न बिश्वाश का
दोष वक़्त का हैं
जो हर समय धोका देता हैं

जब भी कदम बढ़ाना
वक़्त की चाल  नाप लेना
जरा मुश्किल हैं
समय की गति से गतिमान होना

एक मोड़ आएगा
जहाँ वक़्त चाल दिखायेगा
जो आज मिला हैं
चाँद वो कल खो जायेगा

नाराजगी रहेगी
वक़्त मुस्कुराएगा
तुम रोओगे
वो और रुलाएगा
सिसकिया तेरी
उसके कानो की धुन हैं
 तभी तो वक़्त तुझे रुला के आज भी मौन हैं ||


प्रिया मिश्रा :)



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