"तेरी हर शर्त हमें मंजूर हैं "

ये शर्त मानने वाली बात
बाद में शुरू हुई
पहले तो
सिलसिला कुछ यु था
की बेपनाह प्यार था
और बिना जंजीरो के
उसका आना
मुझे बुलाना
मेरी तारीफे
और फिर प्यार से मुझे निहारना
अच्छा था सब कुछ
फिर सुरु हुआ
शर्तो का सिलसिला
एक वादा उसने किया
वो टूट गया
एक वादा मैंने किया
उसे निभाने में मैं टूट रही हूँ
अब वो कहता हैं
 रहने दो ना बातें
और मैं खामोश हो जाती हूँ
अब वो कहता हैं
तुमसे प्यार तो हैं
लेकिन जता नहीं सकता
मैं मान लेती हूँ
दिल में अरमान बहोत हैं
कहने को ,
पर शर्तो का क्या करे
प्यार में सब कुछ चलता हैं
तो  तेरी हर  शर्त भी मंजूर हैं ||

तू कहे तो सब मंजूर
तेरी सारी नादानियाँ माफ़
तेरी हर बात सर आँखों पे
तुझसे जुड़ा हर  बात पाक
तेरे शब्दों को कहानी बना दूँ
तेरे हर सपने को अपने आँखों में सजा लूँ
तेरे लिए दुआएं मांगे हैं
कैसे अब उस दुआ की शिकयत करू
तो क्यों ना तेरी हर शर्त को मंजूर कर लू
प्यार में सब कुछ चलता हैं
तो तेरी हर शर्त मंजूर हैं ||

प्रिया मिश्रा :)





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