जब लोग मुझसे कहते हैं
मैं तुझे अब जानने लगा हूँ
जाने क्यू एक अजीब सा डर
मन को घेर लेता हैं !!
अपने लिए नहीं उसके लिए
की ये फिर भटकेगा
मेरी छाया को भटकायेगा
और फिर एक दिन कहेगा
मैं ऐसा आदमी नहीं हूँ
मैं वैसा आदमी नहीं हूँ
और मेरे सामने
आकर मुझसे मेरे ही
रूप को
एक गलत
प्रतिरूप ,
दिखा के लौट जायेगा
फिर वही जहाँ से आया था
भटकता हुआ सा
और फिर कही और भटकेगा !!
प्रिया मिश्रा
मैं तुझे अब जानने लगा हूँ
जाने क्यू एक अजीब सा डर
मन को घेर लेता हैं !!
अपने लिए नहीं उसके लिए
की ये फिर भटकेगा
मेरी छाया को भटकायेगा
और फिर एक दिन कहेगा
मैं ऐसा आदमी नहीं हूँ
मैं वैसा आदमी नहीं हूँ
और मेरे सामने
आकर मुझसे मेरे ही
रूप को
एक गलत
प्रतिरूप ,
दिखा के लौट जायेगा
फिर वही जहाँ से आया था
भटकता हुआ सा
और फिर कही और भटकेगा !!
प्रिया मिश्रा
thank you :)
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