मुझे तुम्हे पानी की जिद्द
और तुम्हारे बातो की तलब है

सोचता हूँ , जिद्द और बढ़ा दूँ
सुना है , जिद्द से हौसले बुलंद होते है
और हौसलों से उड़ान मिलती है
और उड़ान जितनी गहरी होती है
तलब उतनी जायदा बढ़ती है
और तलब जितनी जायदा हो
जिद्द और बढ़ती है
फिर कायनात भी झुकता है
बादल भी बरसता है
फिर किस्मत की  बंजर ज़मीन में
फ़ुट ही जाते हैं
प्यार के अंकुर ||

प्रिया मिश्रा :)

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