ये कैलेंडर जो हैं न
रोज तारीखों के कपड़े बदलता हैं !!
कभी इकीस पहना कभी दो पहना
और हर माह अपना घर बदल लेता हैं
आज जनवरी में हैं ,
कुछ दिनों बाद मार्च में
फिर ओक्टुबर और फिर से
नए नए तारीखों के कपड़े बदल कर
ये जनवरी में आ जायेगा !!
ये किसी का नहीं
और कोइ इसका नहीं
लोग भी तो इसका उपयोग
सिर्फ दिन गीन ने के लिए करते हैं
आज सोमवार हैं फलाना तारीख हैं
जैसे अगर ये न होता तो सोमवार आता ही नहीं
और नहीं तारीखे बदलती
लोग भी इसे एकदम संभाल के सबसे ऊपर
की किल में टांगते हैं
कही फाटे न कुछ हो न
और कैलेंडर तन के वहाँ आरामसे बैठा
रहता हैं , कोइ बुलाएगा
कोइ साधन भेजेगा तो ही
आएगा वरना टंगा हैं इसको क्या पड़ी हैं
कोइ मरे कोइ जिए
और हम भी कम नहीं हैं
जब तक जरुरत हैं तबतक इसके
सारे नखरे उठाते हैं
और फिर, या तो ये यु ही फेक दिया जाता हैं
या फिर नए साल की मिठाईया लपेट- लपेट के दी जाती हैं
बस इतनी सी कहानी के
लिए ये कैलेंडर पैदा होता हैं
और गुजर जाता हैं !!
प्रिया मिश्रा

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