दर्द ही दर्द हैं जीवन में

एहसास हैं बस एक
कुछ टुटा हैं खुद में
की नजर नहीं आती
वो नब्ज़ जो टीश दे जाती हैं
क्या कहे क्या हैं जीवन में
बस इतना जाने
दर्द ही दर्द हैं जीवन में ||

कल की थाली उलटी पड़ी हैं
रुखा - सूखा आँगन पड़ा हैं
उदाश सी जिंदगी के कोने में
कोइ एक कोना भींगा पड़ा हैं
अब भींग भी जाये सारा जहाँ तो क्या गम हैं
की नीर  ही नीर हैं
अखियन में ,
दर्द ही दर्द हैं जीवन में ||

छुपा लूँ खुद को
ऐसा कोइ अँधेरा बताओ
रौशनी से अब मेरा नाता हटाओ
की चाँद से अब कोइ वास्ता नहीं
चांदनी नहीं आती अब
सपनो के नैनन में
दर्द ही दर्द है जीवन में ||

बादलो का बरषना ,
इस बार न हो पायेगा
जो होगा वो डूबा के जायेगा
अब कहाँ  वो पहली वाली बांध होगी
जो बांध लेगी मुझे
इस बार किनारा तक कट जायेगा
अब हम रह जायेंगे सिर्फ
बतियन में ,
दर्द ही दर्द हैं जीवन में ||

प्रिया मिश्रा :)

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