गणतंत्र दिवस
संबिधान बना था आज के दिन
एक नए कल की सोच ने जन्म लिया था
बरसो पहले ,
एक समाज की नीव रखी गयी थी
एक नए पौधे ने आँख खोला था
लेकिन जी न पाया वो
बस साँस भर लेता रहा
घुटता रहा
सिमटा रहा
लोग आते गए नए शब्दों के नए अर्थ लाते गए
अर्थ का अनर्थ निकला
और धीरे - धीरे
सब कुछ बदलता गया
आज तो पता भी नहीं
क्या लिखा हैं उस पन्ने में
जो लिखा हैं ,
क्या हमने वही पढ़ा हैं
या जो नहीं लिखा हैं हमने वो समझा हैं
बात इतनी सी हैं
मानवता अब बस साँस भर ले रही
फिर भी आज का दिन सबके दिलो में बस्ता है
तो आओ कुछ फूल अर्पित करे उन चरणों में
जिन्होंने कल के लिए सोचा
कुछ लिखा
कुछ समझा
कुछ समझाया
कुछ प्रेरणा दी
कोइ इतिहास रचा
जिसे दोहराओ तुम भी
बस उस इतिहास की कोइ
गलतिया न दोहराना
अब सुरु करो नया भारत बनाना
बहोत कुछ सीखा हमने
बहोत कुछ हमें इस जन्मभूमि ने सिखाई
आज भारत माता के चरणों में नमस्कार करके
आप सभी को गणतंत्र दिवश की हार्दिक बधाई
जय हिन्द
जय भारत
प्रिया मिश्रा :)
संबिधान बना था आज के दिन
एक नए कल की सोच ने जन्म लिया था
बरसो पहले ,
एक समाज की नीव रखी गयी थी
एक नए पौधे ने आँख खोला था
लेकिन जी न पाया वो
बस साँस भर लेता रहा
घुटता रहा
सिमटा रहा
लोग आते गए नए शब्दों के नए अर्थ लाते गए
अर्थ का अनर्थ निकला
और धीरे - धीरे
सब कुछ बदलता गया
आज तो पता भी नहीं
क्या लिखा हैं उस पन्ने में
जो लिखा हैं ,
क्या हमने वही पढ़ा हैं
या जो नहीं लिखा हैं हमने वो समझा हैं
बात इतनी सी हैं
मानवता अब बस साँस भर ले रही
फिर भी आज का दिन सबके दिलो में बस्ता है
तो आओ कुछ फूल अर्पित करे उन चरणों में
जिन्होंने कल के लिए सोचा
कुछ लिखा
कुछ समझा
कुछ समझाया
कुछ प्रेरणा दी
कोइ इतिहास रचा
जिसे दोहराओ तुम भी
बस उस इतिहास की कोइ
गलतिया न दोहराना
अब सुरु करो नया भारत बनाना
बहोत कुछ सीखा हमने
बहोत कुछ हमें इस जन्मभूमि ने सिखाई
आज भारत माता के चरणों में नमस्कार करके
आप सभी को गणतंत्र दिवश की हार्दिक बधाई
जय हिन्द
जय भारत
प्रिया मिश्रा :)
Comments
Post a Comment