माँ
माँ
मैं आपसे कितना भी प्यार करू कम हैं
क्युकी आपका उससे जायदा होगा मेरे लिए
यहाँ सब कुछ हैं बस आप नहीं हो ,
तो कुछ भी नहीं हैं
आपकी कमी पूरा करे ऐसा कोइ नहीं
और आप भी मेरे पास नहीं ||
इस बड़े से घर में सिर्फ चारदीवारी हैं
और इस चारदीवारी में
खालीपन ,
उस खालीपन , में
मैं आपको ढूंढ़ती हुई
आपके प्यार को ढूंढ़ती हुई ||
यहाँ बड़े से बिस्तर पे
बड़े से कम्बल को लपेटे
मैं जब सोती हूँ
तो भी अकेले ही रहती हूँ
क्युकी ,
जब वो कम्बल आधी रात में
गिर जाती हैं , तो
कोइ उसे आपकी तरह प्यार से
नहीं डालता मुझपे
प्यार से सर नहीं सहलाता
और माथा चुम के
कोइ यु प्यार से निहारता नहीं
सन्नाटा रहता हैं
और मैं खामोश रहती हूँ ||
भूख लगती हैं
तो नूडल्स बन जाते हैं
प्यार वाली रोटियां अब नसीब नहीं होती
वो सोंधी सी मिट्टी के चूल्हे पर
प्यार सी सिकी रोटी
आपके हाथो की
उसे कौन से पैसे से खरीदू
कोइ कीमत नहीं उनकी
तभी तो कीमतों में उलझ कर
सुलझ नहीं पा रहे ||
क्या कहूं माँ आप
बहोत याद आ रहे ||
प्रिया मिश्रा :)
माँ
मैं आपसे कितना भी प्यार करू कम हैं
क्युकी आपका उससे जायदा होगा मेरे लिए
यहाँ सब कुछ हैं बस आप नहीं हो ,
तो कुछ भी नहीं हैं
आपकी कमी पूरा करे ऐसा कोइ नहीं
और आप भी मेरे पास नहीं ||
इस बड़े से घर में सिर्फ चारदीवारी हैं
और इस चारदीवारी में
खालीपन ,
उस खालीपन , में
मैं आपको ढूंढ़ती हुई
आपके प्यार को ढूंढ़ती हुई ||
यहाँ बड़े से बिस्तर पे
बड़े से कम्बल को लपेटे
मैं जब सोती हूँ
तो भी अकेले ही रहती हूँ
क्युकी ,
जब वो कम्बल आधी रात में
गिर जाती हैं , तो
कोइ उसे आपकी तरह प्यार से
नहीं डालता मुझपे
प्यार से सर नहीं सहलाता
और माथा चुम के
कोइ यु प्यार से निहारता नहीं
सन्नाटा रहता हैं
और मैं खामोश रहती हूँ ||
भूख लगती हैं
तो नूडल्स बन जाते हैं
प्यार वाली रोटियां अब नसीब नहीं होती
वो सोंधी सी मिट्टी के चूल्हे पर
प्यार सी सिकी रोटी
आपके हाथो की
उसे कौन से पैसे से खरीदू
कोइ कीमत नहीं उनकी
तभी तो कीमतों में उलझ कर
सुलझ नहीं पा रहे ||
क्या कहूं माँ आप
बहोत याद आ रहे ||
प्रिया मिश्रा :)
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