यु तो मैं मजबूत हूँ

सब कहते हैं
मैं मजबूत हूँ
लेकिन पत्थर भी
तुफानो से टूट जाया करता हैं

कहने को तो
मैं हर रोज
हर वक़्त मुस्कुराती हूँ
पर हर शाम आँखों में
 पानी भर जाया करता हैं ||

ये मजबूती का नाटक
जाने कब तक चलेगा
जब तक सांसे हैं
क्या तब तक चलेगा
लेकिन सांसे भी तो टूट जाया करती हैं
 और याद भी छूट जाया करते हैं

प्रिया मिश्रा :)

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