"कुछ ख्वाब दफ़न होने को है "

 एक बात ख़तम होने वाली है
 रात खोने वाली हैं
 दिन ढलने वाला हैं
 चाँद गुम होने को हैं
 कुछ ख्वाब दफ़न होने को है ||

 एक कहानी का शीर्षक शुरू हुआ हैं
अभी - अभी
 वो कहानी बन के उभर के आएगा
 फिर अंत आ जायेगा
 उस अंत का आगाज होने को हैं
 कुछ ख्वाब दफ़न होने को है  ||

 प्रिया मिश्रा :)





Comments

Popular posts from this blog