"हम रहे ना रहे "

दिन गुजर ही जायेगा
रात ढल ही जाएगी
मौसम बदलता रहेगा
क्या फर्क पड़ता हैं
हम रहे ना रहे ||

सब कही गुम जायेंगे
 मुझे याद करने वाले
सब की अपनी दास्ताँ होगी
हम ना किसी को याद आएंगे
ये  वक़्त भी गुजर गया
वो वक़्त भी गुजर जायेगा
क्या फर्क पड़ता है
हम रहे ना रहे ||

पुराने पेड़ के पत्ते गिर जाते है
पेड़ खाली नहीं होता
नए पत्ते आ ही जाते है
गिरे पत्तो का कहाँ कोइ मकान होता है
बंजारा सा बन के यहाँ वहां उड़ता रहता है
हम भी बंजारे से हो जायेंगे
तुम रह लेना खुद का आशियाँ बचा के
क्या फर्क पड़ता है
हम रहे ना रहे ||

प्रिया मिश्रा :)

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