"तुम सबसे प्यारी हो "

 सूखे पेड़ से एक बीज गिरा
जमीन में जाके कही दब गया
उससे फूटा एक अंकुर
थोड़ी पानी
थोड़ी हवा
थोड़ा धुप
और अंकुर हो गया पौधा
पौधा अब खुली हवा में साँस लेने लगा
कुछ दिन बाद उसपे
फुल आने लगे
वो फुल आँख से मुस्कुराने लगे
सबको भाता वो पौधा
आसमा को भी भाने लगा
फिर एक दिन एक भावरा आया
कली पे वो मंडराने लगा
कली  जरा सी शरमाई
भवरे को देख के इतराई
भावरा निकला सयाना
उसे तो था रोज एक कली लुभाना
वो चला गया कही और
किसी और कली का दिल लुभाने
ये नन्ही कली
अब उदाश रहने लगी
पेड़ का पत्ता - पत्ता
उस कली के उदाश रहने लगा
जड़ो तक उदासी जा पहुंची
मिटटी भी वहाँ की बंजर सी नजर आने लगी
फिर एक दिन एक और भौरा आया
उसने कली की आत्मा को देखा
वो छू गया कली के दिल को
बोला ,
सुन कली
तू है इतनी सुन्दर
तुझमे सितारों की रौशनी बस्ती है
मेरी आँखों से देख
तेरे रंगो को
तेरे रंगो में कितना प्यारा छुपा कोइ रंग है
तुझमे बस्ता कोइ
पाक , ओश की बून्द की तरह
प्यार , मेरे दिल को भा गया है
मैं धीरे - धीरे तेरा होने लगा हूँ
तू धीरे - धीरे मेरी बन जा
चल तू फिर से मुस्कुरा
तुझे जो बात है
वो कहाँ किसी और में कही
तुझे नहीं पता
तू कितनी खास है
मैं चाहता हूँ
तू हर घर
हर क्यारी हो
तुम्हे नहीं पता
तुम कितनी प्यारी हो ||

प्रिया मिश्रा :)

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