ये चाँद हैं या
किसी ने जी ललचाने को
रोटी आसमान में टांगी हैं
या कोइ मुझसे आँख मिचौली खेल रहा
कभी रोटी बादल में छुप रही
कभी एक टुकड़ा सा दिख रहा !!
एक बच्चा भूख से बिलबिलाता हुआ
अपनी माँ से पूछ रहा !!
माँ क्यों नहीं वो
रोटी तोड़ लाती
कल से मैंने कुछ नहीं खाया
क्यों वो मुझे ललचा - ललचा बदलो में छुप रहा !!
प्रिया मिश्रा :)
किसी ने जी ललचाने को
रोटी आसमान में टांगी हैं
या कोइ मुझसे आँख मिचौली खेल रहा
कभी रोटी बादल में छुप रही
कभी एक टुकड़ा सा दिख रहा !!
एक बच्चा भूख से बिलबिलाता हुआ
अपनी माँ से पूछ रहा !!
माँ क्यों नहीं वो
रोटी तोड़ लाती
कल से मैंने कुछ नहीं खाया
क्यों वो मुझे ललचा - ललचा बदलो में छुप रहा !!
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